असपा प्रमुख ने योगी जी पूछा, क्या राज्य का कामकाज कथाओं और कथावाचकों से चलेगा
बहराइच में कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को पुलिस अधीक्षक रामनयन सिंह द्वारा दी गयी सलामी का मामला तूल पकडऩे लगा है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्टï्रीय अध्यक्ष चन्द्रशेखर आजाद ने इस प्रकरण में गहरी आपत्ति जताते हुए यूपी के डीजीपी को सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि महोदय द्वारा पुलिस परेड ग्राउंड के अनधिकृत उपयोग पर संज्ञान लेना केवल एक रस्म अदा करने वाली प्रतिक्रिया है, लेकिन यह बयान मूल और गंभीर प्रश्न से सा$फ तौर पर बचता है। क्योंकि मूल मुद्दा तो यह है कि आखिर कथावाचक को एसपी बहराइच द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया ही क्यों गया? उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे लिखा है कि मुद्दा किसी स्थान के उपयोग का नहीं बल्कि मूल सवाल तो ये है कि संवैधानिक नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए किस अधिकार, किस कानून और किस प्रोटोकॉल के तहत एक धार्मिक कथावाचक को गार्ड आफ ऑनर दिया गया?

चन्द्रशेखर आजाद ने कहा कि गार्ड आफ ऑनर धर्म और आस्था का विषय नहीं बल्कि राज्य की संप्रभु शक्ति और संवैधानिक सम्मान का प्रतीक है। डीजीपी महोदय भूल गए लेकिन संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री कैसे भूल गए कि भारत में गार्ड आफ ऑनर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, न्यायपालिका, सेना के सर्वोच्च पद, किसी शहीद जवान या विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के लिए होता है। किसी धार्मिक कथावाचक के लिए नहीं।
किसी धार्मिक व्यक्ति को सलामी देना धर्मनिरपेक्षता की हत्या है, राज्य शक्ति का खुला दुरुपयोग है, संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 27 का सीधा उल्लंघन है। मुख्यमंत्री जी क्या इस तथाकथित रामराज्य में राजकाज संविधान और कानून से नहीं, बल्कि कथाओं और कथावाचकों से चलेगा? उल्लेखनीय है कि बहराइच के पुलिस लाइन में 8 से 14 नवंबर तक वृंदावन के कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी द्वारा कथावाचन के दौरान एसपी ने उन्हें गार्ड आफ ऑनर दिया था, यह मामला सोशल मीडिया में आने के बाद डीजीपी ने मामले का संज्ञान लेते हुए एसपी से स्पष्टïीकरण मांगा है।