असपा प्रमुख चन्द्रशेखर आजाद 30 मई को अम्बेडकर महासभा में स्थापित बाबा साहब की पवित्र अस्थि कलश को देखने आएंगे लखनऊ

लखनऊ। यूपी की राजधानी लखनऊ में ऐशबाग में पिछले दो साल पहले बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के स्मारक की नीव पडऩे के साथ ही यह माना जा रहा था कि विधानसभा के सामने स्थित अम्बेडकर महासभा परिसर उसी भव्य अम्बेडकर स्मारक में शिफ्ट होगा।
भव्य अम्बेडकर स्मारक का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो गया है और उम्मीद की जा रही है कि अगस्त माह तक महासभा परिसर भी इसी स्मारक में शिफ्ट हो जाएगा। अम्बेडकरवादियों और बहुजन समाज जो अब समाजवादी पार्टी का पीडीए समाज है, इसे अम्बेडकर महासभा के शिफ्ट होने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन राज्य की योगी सरकार महासभा परिसर के साथ ही वहां स्थापित बाबा साहब के पवित्र अस्थि कलश को भी स्थापित करना चाहती है। अस्थि कलश के हटाने का विरोध हो रहा है।
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नगीना से सांसद चन्द्रशेखर आजाद ने तीन दिन पहले यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर बाबा साहब की पवित्र अस्थियों को महासभा परिसर से हटाने पर अपनी आपत्ति जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि बाबा साहब की पवित्र अस्थियों को किसी भी कीमत पर महासभा परिसर से कहीं अन्यत्र शिफ्ट न किया जाए। उनका कहना है कि बाबा साहब की पवित्र अस्थियों से करोड़ों बहुजनों की आस्था जुड़ी हुई है।

ऐसे में अगर उनकी अस्थियों को कहीं और स्थापित किया गया तो उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचेगी।
फिलहाल चन्द्रशेखर आजाद तीस मई को लखनऊ आ रहे हैं और वे अम्बेडकर महासभा परिसर में स्थापित बाबा साहब के पवित्र अस्थि कलश का दर्शन करेंगे।
उनका कहना है कि करोड़ों बहुजन समाज के लोगों की भावनाओं के साथ किसी भी कीमत पर किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। बाबा साहब की अस्थियों को शिफ्ट करने के मामले में जहां राजनीतिक उबाल आया हुआ है। ऐसे में बहुजन समाज पार्टी पूरी तरह से शांत है।
जबकि बहुजन नायक कांशीराम जी ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों से प्रभावित होकर उनके विचारों को आगे बढ़ाने के लिए ही बाबा साहब के जन्मदिन के मौके पर ही बहुजन समाज पार्टी का गठन किया था। हालांकि जबसे बसपा की कमान मायावती जी के हाथों में आयी है तबसे इस पार्टी में बहुजनों के बजाय सर्वजन की बात होने लगी है।
वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बसपा के बहुजन समाज को सपा से जोड़ने के लिए पीडीए समाज स्थापित किया है। सपा प्रमुख पीडीए समाज की किसी भी समस्या पर प्रमुखता से अपनी बात रखते हैं और इन वर्गों के साथ हो रहे अन्याय व अत्याचार के खिलाफ अपना मजबूत विरोध भी दर्ज कराते हैं। यही वजह है कि सपा के अन्य वरिष्ठ नेता भी पीडीए समाज, संविधान और आरक्षण के मुद्दे पर मुखर होकर अपनी बात को रख रहे हैं।

बाबा साहब के प्रति केवल दलित समाज का ही नहीं बल्कि पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक खासतौर पर मुस्लिम समाज का भी बहुत लगाव
बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की पवित्र अस्थियों के हटाने के सरकार के फैसले के खिलाफ सपा के वरिष्ठ नेता एवं यूपी के पूर्व राज्यमंत्री सलाहउद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि भाजपा ने बाबा साहब की पवित्र अस्थि कलश को हटाने के लिए अभियान तेज कर दिया है।
उन्होंने कहा कि बाबा साहब के प्रति केवल दलित समाज का ही नहीं बल्कि पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक खासतौर पर मुस्लिम समाज का भी बहुत लगाव है, क्योंकि इन वर्गों को बाबा साहब द्वारा स्थापित भारतीय संविधान से ही सारे अधिकार प्राप्त हैं। ऐसे में अगर बाबा साहब के पवित्र अस्थि कलश को महासभा परिसर से हटाने की कोशिश हुई तो इसका लोकतांत्रिक तरीके से सपा कार्यकर्ता विरोध करेंगे।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता सलाहउद्दीन सिद्दीकी ने कहा ये बाबा साहब का नहीं बल्कि पूरे पीडीए समाज का अपमान
सलाहउद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि प्रश्न यह है कि यदि सरकार वास्तव में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के विचारों, संघर्षों और योगदान का सम्मान करती है, तो उनके अस्थि कलश को विधानसभा भवन के सामने से हटाने की जरूरत न पड़ती? इससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि भाजपा का अंबेडकर प्रेम केवल प्रतीकात्मक और राजनीतिक लाभ तक सीमित है।
बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल एक महान व्यक्तित्व नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता, मानवाधिकार, लोकतंत्र और संविधानिक मूल्यों के जीवंत प्रतीक हैं। उनके अस्थि कलश को इस प्रकार स्थानांतरित करना करोड़ों दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, वंचितों और संविधान समर्थक लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है। पीडीए समाज अपने सम्मान, स्वाभिमान और बाबा साहेब के प्रति किसी भी प्रकार की उपेक्षा को कभी स्वीकार नहीं करेगा। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और योगी सरकार को इस अपमान का राजनीतिक एवं सामाजिक खामियाजा अवश्य भुगतना पड़ेगा।