यह स्थल देश-विदेश के करोड़ों बुद्ध व अंबेडकर अनुयायियों की आस्था एवं पूजा स्थल का प्रतीक
कमल जयंत
लखनऊ। यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री व डॉ. अम्बेडकर अस्थि कलश बचाओ संघर्ष मोर्चा के प्रदेश संयोजक केके गौतम का कहना है कि भाजपा के लोग डॉ. अम्बेडकर के नाम को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।
यूपी में भाजपा की सरकार है और ये सरकार अब विधानसभा के सामने स्थित अम्बेडकर महासभा परिसर से बाबा साहब के अस्थि कलश को भी हटाना चाहती है, लेकिन बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के लाखों अनुयायी किसी भी कीमत पर महासभा परिसर से बाबा साहब के अस्थि कलश को हटने नहीं देंगे।
उनका कहना है कि सरकार ऐशबाग में बाबा साहब के नाम से एक भव्य स्मारक बना रही है। इस नेक कार्य करने के लिए उसका स्वागत है, सरकार उस स्मारक में बाबा साहब की स्मृतियों को सजोकर रखे, जैसे बाबा साहब का कोट है, उनकी कुर्सी, मेज है।
बाबा साहब का चश्मा है। इसे लाखों अम्बेडकर अनुयायी देखने आयेंगे, लेकिन विधानसभा के ठीक सामने स्थित अम्बेडकर महासभा परिसर से उनकी अस्थियों को हटाने का प्रयास निंदनीय है। दरअसल ये सरकार जो आरएसएस की विचारधारा से चलती है, उसे बाबा साहब का नाम बर्दाश्त नहीं हो रहा है।
बाबा साहब के नाम से बने इस मार्ग को समाप्त करने के लिए ही इस सरकार ने हजरतगंज चौराहे का नाम अटल चौक रख दिया
यही वजह है कि विधानसभा के सामने से बाबा साहब के परिसर को खत्म करने के साथ ही उनकी अस्थियों को भी वहां हटाने की योजना चल रही है।
बाबा साहब के नाम से बने इस मार्ग को समाप्त करने के लिए ही इस सरकार ने हजरतगंज चौराहे का नाम अटल चौक रख दिया। इस सरकार को न सिर्फ बाबा साहब से बल्कि उनके संविधान से भी दिक्कत है। यही वजह है कि राज्य की भाजपा सरकार संविधान में दिये गये नियमों को दरकिनार करके बाबा साहब की अस्थियों को ऐशबाग में तैयार हो रहे अम्बेडकर स्मारक में शिफ्ट करना चाहरही है। यदि इन राष्ट्रीय धरोहरों एवं आस्था के प्रति से छेड़छाड़ की जाती है तो देश-विदेश के करोड़ों अंबेडकर व बुद्ध अनुयायी आक्रोशित होकर आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

उनका कहना है कि पिछले हफ्ते लखनऊ में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि बहुजन समाज के देश के समस्त सांसदों, उत्तर प्रदेश के विधायकों तथा राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को भी ज्ञापन भेजकर अंबेडकर महासभा को ना हटाए जाने के लिए प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को लिखने के लिए अनुरोध किया जाए।
साथ ही यह भी प्रत्येक रविवार सायं 6:00 बजे से अंबेडकर महासभा स्थित भगवान बुद्ध की प्रतिमा व बाबा साहब केअस्थि कलश पर बुद्ध वंदना पूजा अर्चना आयोजित की जाए। इसी क्रम में महासभा परिसर में बाबा साहब के अस्थि कलश की वंदना की गयी और उनके संगठन का यह कार्य हर रविवार को किया जाएगा।
संविधान के अनुच्छेद 49 के अनुसार आस्था एवं पूजा के ऐसे स्थलों व प्रतीकों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार का उत्तरदायित्व है जो स्वेच्छा नहीं बल्कि उसके लिए बाध्यकारी
गौतम का कहना है कि अंबेडकर महासभा स्थल पर बाबा साहब के अस्थि कलश की स्थापना उनकी पत्नी डॉक्टर सविता अंबेडकर के द्वारा राजकीय सम्मान के साथ 14 अप्रैल 1991 को की गई थी। 21 अप्रैल 1993 को तत्कालीन उपराष्ट्रपति श्री के आर नारायणन जी द्वारा बोधि वृक्ष की स्थापना की गई थी। 6 दिसंबर 2001 को राजनाथ सिंह द्वारा 101 फीट ऊंची बुद्ध प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की गई थी तथा 14 सितंबर 2017 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के द्वारा धाम चक्र की स्थापना की गई थी। इस प्रकार यह स्थल देश-विदेश के करोड़ों बुद्ध व अंबेडकर अनुयायियों की आस्था एवं पूजा स्थल का प्रतीक है। उनका कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 49 के अनुसार आस्था एवं पूजा के ऐसे स्थलों व प्रतीकों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार का उत्तरदायित्व है जो स्वेच्छा नहीं बल्कि उसके लिए बाध्यकारी है। आस्था के इन प्रतीकों को इस सार्वजनिक स्थल से हटाकर किसी किसी के व्यक्तिगत नाम व व्यक्तिगत पते पर रजिस्टर्ड ट्रस्ट भवन में किसी भी दशा में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है।