जनरल डायर ,जलियांवाला बाग और उधम सिंह

शिवचरण चौहान
13 अप्रैल 1919 का दिन भारतीय इतिहास में घृणित और बर्बर घटना के लिए जाना जाता है। इसी दिन वैशाखी को कर्नल रेजीनाल्ड एडवर्ड हैरी डायर ने अमृतसर के जलियांवाला बाग में 1650 राउंड गोलियां चलवा कर करीब 1000 निहत्थे लोगों को मौत के घाट उतार दिया था और इस गोलीकांड में 2000 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। सरकार ने जलिया वाला बाग में जीर्णोद्धार करवा कर उन निशानों को मिटा दिया है जो गोलियों के कारण बने थे। ये गोलियां 303 एनफील्ड राइफल से चलाई गई थीं और सिपाहियों के पास 1650 राउंड गोलियां ही थी जो सब चला दी गईं।
जनरल डायर को अमृतसर का कसाई कहा गया और उसकी दुनिया भर में निंदा हुई अंग्रेजों ने उसके खिलाफ जांच बैठाई और उसे फिर कर्नल बना दिया गया। पहले उसे कर्नल से प्रमोट करके ब्रिगेडियर बनाया गया था और अमृतसर में सिखों को सबक सिखाने के लिए भेजा गया था। कर्नल से ब्रिगेडियर बनते ही 11 अप्रैल 1919 को ब्रिगेडियर जनरल डायर अमृतसर छावनी पहुंच गया और उसने सिख जनता में भय और आतंक उत्पन्न करने के लिए गिरफ्तारियां शुरू कर दी पूरे शहर में सेना का मार्च पास्ट कराया गया । ताकि जनता डर जाए।रोलेट अधिनियम पर चर्चा करने के लिए जलियांवाला बाग में स्थानीय लोगों ने एक सभा बुलाई थी। सभा की सूचना जनरल डायर को मिली तो वह बौखला गया और उसने फैसला कर लिया कि आज वह अमृतसर के सिखों को सबक सिखा कर रहेगा।
जनरल डायर 90 सिपाहियों को लेकर जलियांवाला बाग पहुंचा था और उसने 10 मिनट में हत्याकांड को अंजाम दे दिया। लगातार 10 मिनट की फायरिंग में 1000 लोग मारे गए बूढ़े बच्चे तक को भी नहीं छोड़ा गया। घटना के बाद पूरे अमृतसर में मार्शल ला लगा दिया गया। उधम सिंह ने इस घटना पर शपथ ली थी कि वह जनरल डायर को मारकर बदला लेंगे किंतु उधम सिंह ने जिस डायर को मारा वह जलिया बाग में गोलियां चलाने वाला डायर नहीं था। वह था पंजाब का लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ डायर। माइकल ओ डायर ने जलिया वाले बाग हत्याकांड को सही ठहराया था इसी कारण उधम सिंह ने इंग्लैंड जाकर माइकल ओ डायर को गोली मार दी और फांसी पर झूल गए।
जलिया वाले बाग में गोलियां चलाने वाला डायर बड़ी बुरी मौत मरा। 13 अप्रैल 1919 को गोली चलाने के बाद जनरल डायर एक भी रात ठीक से सो नहीं पाया। उसे हाई ब्लड प्रेशर हो गया था । वह रात दिन कुछ बड़ब डाता रहता था और कुछ हाई ब्लड प्रेशर के कारण ही उसे 1921 में लकवा मार गया था। इस से वह उबर नहीं पाया और 23 जुलाई 1927 में बिस्ट्रल में उसकी मौत हो गई थी। मरने के पहले तक जनरल डायर कहा करता था कि उसने गलत किया या सही या वह खुदा से जाकर पूछेगा? जलियांवाला बाग हत्याकांड की घटना के बाद हिंदुस्तान के लोगों में अंग्रेज सरकार को उखाड़ फेंकने का जुनून सवार हो गया था। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर शहीदों के गांव घर को स्मारक बनवाकर उनकी प्रतिमाएं लगवा कर वहीं पर तिरंगा फहराया जाना चाहिए था तभी शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी!