अल्पसंख्यक समुदायों पर कानून अलग क्यों : अमित गौतम

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क्रिसमस पर चर्च के सामने हिंदू धर्म के धार्मिक अनुष्ठान करने और वहां नारेबाजी करने की ऐसे तत्वों को अनुमति किसने दी

लखनऊ। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रदेश कोषाध्यक्ष अमित गौतम ने कहा कि यह हमारे समाज का दुर्भाग्य है कि जब शोभा यात्रा निकलेगी तो मस्जिदों को ढक दिया जाता है लेकिन क्रिसमस पर चर्च के सामने अपने धार्मिक अनुष्ठान करने और वहां नारेबाजी करने की ऐसे तत्वों को परमिशन किसने दी?

लखनऊ के हज़रत गंज और बरेली में जिस तरह अल्पसंख्यक समुदायों को अपने धार्मिक अनुष्ठान करने में विघ्न उत्पन्न किया गया वह सनातन धर्म की महानता पर प्रहार है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का मतलब है।


‘पूरी दुनिया एक परिवार है। ‘अर्थात् सम्पूर्ण मानवता एक ही परिवार का हिस्सा है। यह विचार सभी मनुष्यों के प्रति समानता, भाईचारा, करुणा और सह-अस्तित्व की भावना को दर्शाता है। यही भारतीय दर्शन का मूल सिद्धांत है। भेदभाव, जाति, धर्म और राष्ट्र की सीमाओं से ऊपर उठकर सोचने की प्रेरणा देता है।

वैश्विक शांति और मानवता की भावना को मजबूत करता है। भारतीय संविधान सभी को उपासना की स्वतंत्रता का अधिकार देता है लेकिन आप की स्वतंत्रता की अन्य समुदायों की स्वतंत्रता को बाधित न करे। यूपी पुलिस को उचित कार्रवाई करनी चाहिए जिससे भविष्य में इस तरह आपसी सौहार्द बिगाडऩे की कोशिश करने वालों पर लगाम लगाई जा सके। अमित गौतम ने कहा कि उनका दल बंद कमरों में अपने कैडर को तैयार कर रही है। उम्मीद है कि ये कैडर आंदोलन को नई दिशा देगा। सामाजिक परिवर्तन के लिए कैडर जरूरी है, हम संगठन में कैडर बनाने की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही अपने सामाजिक आंदोलन जो धार दे रहे हैं क्योंकि समाज में परिवर्तन अपने आप नहीं होता। इतिहास साक्षी है कि हर बड़े सामाजिक, राजनीतिक और वैचारिक परिवर्तन के पीछे एक संगठित, प्रशिक्षित और प्रतिबद्ध सामाजिक कैडर की निर्णायक भूमिका रही है। भीड़ आंदोलन को संख्या देती है, लेकिन दिशा, अनुशासन और स्थायित्व केवल कैडर ही प्रदान करता है। ‘भीड़ आंदोलन को आवाज़ देती है, लेकिन सामाजिक कैडर उसे आत्मा, दिशा और भविष्य देता है। लेकिन भीड़ को दूसरे धर्म के खिलाफ बेलगाम छोडऩे पर वही होता है जो क्रिसमस के मौके पर बरेली और लखनऊ में हुआ।

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