पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम का धनुष और भगवान कृष्ण की बांसुरी बांस से ही बनाई गयी थी, हरा बांस जन्म से लेकर मृत्यु तक प्रासंगिक

लखनऊ। बांस के कार्य से जुड़ी धरकार, बसोड़, वेन बंशी, बांसफोड़ आदि जातियों का महासम्मेलन आगामी 30 सितम्बर को पूर्वाहन 11 बजे से विश्वेश्वरैया सभागार, लखनऊ में आयोजित हो रहा है। इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए सदस्य विधान परिषद डा. लालजी प्रसाद निर्मल ने बताया है कि भारतीय संस्कृति और हिन्दू परम्परा में बांस को बहुत पवित्र माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम का धनुष और भगवान कृष्ण की बांसुरी बांस से ही बनाई गयी थीं। हरा बांस जन्म से लेकर मृत्यु तक प्रासंगिक है।
डा. निर्मल ने बताया कि बांस की अनुपलब्धता, कच्चे माल की कमी, प्लास्टिक के उपयोग ने बांस कार्य करने वाली जातियों को हाशिए पर ला दिया है। वे वर्तमान में आर्थिक बदहाली के शिकार हैं और काफी लोग सड़क के किनारे झोपड़ी बना कर रहने के लिए मजबूर हैं। बांस की व्यापक खेती, बांस शिल्प कला बोर्ड गठित कर बांस कार्य को प्रोत्साहन तथा बांस की खेती के लिए इन वर्गो को पट्टे पर जमीन उपलब्ध करा कर इन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जा सकता है।
सम्मेलन में केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मंत्री जयवीर सिंह तथा असम राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ बांसफोड़ मुख्य रूप से सम्मेलन को सम्बोधित करेंगे।