ईरान ने भारत की अवाम के लिए खोला है होर्मुज का रास्ता : मौलाना कल्बे जवाद

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केन्द्र सरकार तो अमेरिका और इजराइल के साथ, जबकि यहां की अवाम ईरान का साथ दे रही

लखनऊ। मजलिस उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने कहा कि ईरान ने भारत के लिए होर्मुज जलडमरू मार्ग भारत सरकार के आग्रह या दबाव में नहीं खोला, बल्कि हिन्दुस्तान की जनता की मोहब्बत की वजह से खोला है, जिसकी वजह से आज हम भारतवासियों को पेट्रोल और डीजल की दिक्कत नहीं हो रही है। ईरान यह बात अच्छी तरह से जानता है कि अमेरिका और इजराइल के खिलाफ इस जंग में हिन्दुस्तानी अवाम न सिर्फ मुस्लिम बल्कि हिन्दू भी उनके साथ खड़ा है। जबकि भारत सरकार तो अमेरिका और इज़राइल के साथ है। यही वजह है कि ईरान ने होर्मुज के जलडमरू मार्ग को भारत के लिए बिना शर्त खोल दिया है। उन्होंने जुमा की नमाज के बाद आसिफी मस्जिद में लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि भारत में हम लोग आपस में मिलकर रह रहे हैं और आगे भी हिन्दू-मुस्लिम के बीच आपसी सद्भाव व भाईचारा स्थापित रहेगा।

सभी मुस्लिम फिरके जन्नतुल बकी के पुन: निर्माण की आवाज़ उठाएं

जुमे की नमाज अदा करने के बाद हजारों लोगों ने जन्नतुल ब$की के विध्वंस के खिलाफ और पवित्र मज़ारों के पुन: निर्माण के लिए आसिफी मस्जिद में सऊदी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व इमाम-ए-जुमा मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने किया। नमाजि़यों ने जन्नतुल बकी के विध्वंस पर सऊदी सरकार की निंदा करते हुए पवित्र मज़ारों के पुन: निर्माण की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आले सऊद के खिलाफ नारे लगाए और सऊदी शासक मोहम्मद बिन सलमान की तस्वीर जलाकर अपना गुस्सा ज़ाहिर किया। इस दौरान अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ भी नारे लगाए और मुस्लिम शासकों को इन ताकतों का गुलाम करार दिया।

जन्नतुल बकी के विध्वंस के खिलाफ और मज़ारों के पुन: निर्माण की मांग को लेकर आसिफी मस्जिद में नमाज़-ए-जुमा के बाद विरोध प्रदर्शन, मोहम्मद बिन सलमान की तस्वीर जलायी गई

मजलिस उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जन्नतुल बकी के विध्वंस को सौ साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन अफसोस है कि अब तक पवित्र मज़ारों का पुन: निर्माण नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि जन्नतुल बकी के लिए मुसलमानों के सभी फिरकों को आगे आना चाहिए, लेकिन अफसोस उनकी तरफ से जन्नतुल बकी के विध्वंस के खि़लाफ कोई विरोध नहीं होता। जन्नतुल बकी में पैगम्बर-ए-इस्लाम (स.अ.व) की बेटी हज़रत $फातिमा ज़हरा (स अ) पैगम्बर-ए-इस्लाम (स.अ.व) की पत्नियां और सहाबा-ए-कराम की कब्रें हैं, इसके बावजूद मुसलमानों की तरफ से इन कब्रों के विध्वंस पर ख़ामोशी है, इससे ज़्यादा मुसलमानो की बेगैरती और क्या होगी।

 

मुसलमान मौलवी सऊदी अरब और अमेरिका के ज़र खऱीद गुलाम

उन्होंने कहा कि मुसलमान मौलवी सऊदी अरब और अमेरिका के ज़र खऱीद गुलाम हैं, इसलिए वो सऊदी अरब के खि़लाफ आवाज़ नहीं उठाते। आज अमेरिका और इज़राइल ईरान पर मुस्लिम देशों के सर्मथन से हमले कर रहे हैं, लेकिन मुसलमान मौलवियों ने इसकी निंदा तक नहीं की। यहां तक कि मनाब शहर में अमेरिकी हमले में शहीद हुई मासूम बच्चियों पर भी कोई विरोध नहीं किया गया, इससे उनकी ज़हनी गुलामी और पसमांदगी का अंदाज़ा होता है। उन्होंने ने कहा कि अमेरिका की हार के साथ ही मुस्लिम सरकारें समाप्त हो जाएंगी और वहां जनता की स्वतंत्र सरकारें स्थापित होंगी।

मुस्लिम शासक यहूदी मांओं के बेटे हैं, इनमें से कोई भी मुसलमान नहीं

मौलाना ने आगे कहा कि मालूम होना चाहिए कि आखिर ये मुस्लिम शासक ईरान पर हुए हमले के खिलाफ चुप क्यों हैं। मुसलमानों पर ज़ुल्म होते है मगर मुस्लिम सरकारें इसकी निंदा तक नहीं करतीं। इसकी वजह यह है कि ये मुस्लिम शासक यहूदी मांओं के बेटे हैं, इनमें से कोई भी मुसलमान नहीं है। उन्होंने कहा कि गाज़ा में हज़ारों बच्चे, महिलाएं और युवा मारे गए, गाज़ा को मलबे में बदल दिया गया, लेकिन मुस्लिम शासक चुप रहे, इसकी बुनयादी वजह यही है कि ये मुस्लिम शासक यहूदी यहूदी मांओं के बेटे है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका को हार मिली तो सऊदी अरब, कतर, जॉर्डन और अन्य मुस्लिम देशों में जनआंदोलन होगा और सत्ता परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम देशों की जनता जाग रही है लेकिन वहां की सरकारें अमेरिका और इज़राइल की गुलाम हैं। गुलामों से हम कभी ये उम्मीद नहीं कर सकते कि वो ईरान का समर्थन और जन्नतुल बकी के पुन: निर्माण के लिए अमली इकदामात करेंगे। उन्होंने मांग की कि सऊदी सरकार पवित्र मज़ारों का पुन: निर्माण करे या उन्हें पुन: निर्माण की अनुमति दी जाए।
मौलाना कुर्बान अली ने कहा कि सऊदी सरकार को जन्नतुल बकी में पवित्र मज़ारों के पुन: निर्माण की अनुमति देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी हुकूमतें जो ईरान पर हमले में शामिल हों वो मुसलमानो की दोस्त नहीं हो सकतीं। मौलाना गुलाम रज़ा रिज़वी ने कहा कि तथाकथित मुस्लिम सरकारों ने इस्लामी दुनिया को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम देशों की जनता जाग रही है और जल्द ही वहां परिवर्तन होगा। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के मुसलमानों की श्रद्धा जन्नतुल बकी में स्थित पवित्र मज़ारों से जुड़ी हुई है, इसलिए हम पुन: निर्माण की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन में मौलाना कल्बे जवाद नकवी, मौलाना कुर्बान अली, मौलाना इस्तफा रज़ा, मौलाना गुलाम रज़ा रिज़वी, मौलाना फिरोज हुसैन, मौलाना सरताज हैदर ज़ैदी, मौलाना नज़र अब्बास और मौलाना आदिल फराज़ मौजूद रहे।

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