कांशीराम के मूवमेंट को अखिलेश जी आगे बढ़ा रहे : सलाहउद्दीन सिद्दीकी

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सपा में लोहिया वाहिनी के साथ ही अम्बेडकर वाहिनी भी है

कमल जयंत 

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं यूपी के पूर्व राज्य मंत्री (दर्जा प्राप्त) सलाहउद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि बहुजन मूवमेंट से खुद को जोड़े रखने के लिए ही उन्होंने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। दुर्भाग्यवश बहनजी ने बहुजन मूवमेंट को छोड़ दिया। जिसकी वजह से हमें बसपा से नाता तोडऩा पड़ा। अच्छी बात यह है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव जी बहुजन आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं। बाबा साहब और बहुजन नायक कांशीराम जी की विचारधारा को आगे बढ़ा रहे हैं।  दलितों, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। सपा प्रमुख ने पीडीए का गठन वंचित समाज की लड़ाई लडऩे और उन्हें उनके अधिकार दिलाने के लिए ही किया है।

सिद्दीकी ने कहा कि यह अच्छी बात है कि अखिलेश जी इस बात को खुले मन से स्वीकार भी कर रहे हैं कि उनके शासनकाल में प्रोमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर दलित कार्मिकों के साथ न्याय नहीं हुआ। लेकिन उन्होंने दलित समाज के लोगों को यह भरोसा भी दिलाया है कि सरकार बनने पर उनके अधिकारों की रक्षा होगी। फिलहाल संगठन स्तर पर और चुनाव के दौरान टिकट वितरण में अनुसूचित जाति के प्रत्याशियों को सामान्य सीटों से लड़ाया जा रहा है। इससे अखिलेश जी की नेकनीयती का पता चलता है। संगठन में भी अखिलेश जी ने दलित वर्ग के साथ ही पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज का पूरा ख्याल रखा है। लोहिया वाहिनी के साथ ही बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर वाहिनी का भी पार्टी स्तर पर गठन किया है। उनका मकसद बहुजन समाज को उनकी आबादी के मुताबिक उन्हें भागीदारी दिलाना है। जिसके लिए अखिलेश जी लगातार काम कर रहे हैं।

भाजपा और आरएसएस शुरू से ही कर रहे भारतीय संविधान का विरोध

उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस शुरू से ही भारतीय संविधान का विरोध कर रहे हैं। इस बार लोकसभा चुनाव में पार्टी ने खुलकर कह दिया कि चार सौ से अधिक सीटें पाने पर वह भारतीय संविधान को खत्म कर देगी। दरअसल भाजपा देश में गैर बराबरी के आधार पर स्थापित सामाजिक व्यवस्था को लागू करना चाहती है, लेकिन संविधान के रहते उसके लिए यह संभव नहीं है। यही वजह है कि उसने चुनाव में संविधान को खत्म करने का नारा दिया, लेकिन सपा प्रमुख अखिलेश जी ने राहुल गांधी के साथ संविधान बचाने की लड़ाई लड़ी और भाजपा को केन्द्र में दो बैशाखियों के सहारे ला दिया।

उनका कहना है कि दलितों, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को एकजुट होकर सांप्रदायिक ताकतों का मुकाबला करना होगा और जबतक ये शक्तियां सत्ता में रहेंगी देश और प्रदेश के मजलूमों के साथ अन्याय और अत्याचार करती रहेंगी। हमें इनके अन्याय और अत्याचार से निजात पाने के लिए इन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाना होगा इसके लिए जरूरी है कि ८५ फ़ीसदी बहुजन समाज एकबार फिर एकजुट होकर अगले साल यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव में शिकस्त दे और राज्य में सपा की सरकार बनाये तभी वंचितों को उनके अधिकार मिल सकेंगे और उनके साथ न्याय हो सकेगा।

सिद्दीकी ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियां सभी जाति, वर्ग और धर्म के विरुद्ध हैं। ऐसे में सभी वर्ग के लोग भाजपा का मुखर होकर विरोध कर रहे हैं। शंकराचार्य के अपमान से हिन्दू धर्म के लोग इस सरकार का विरोध कर रहे हैं। दलित, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज के लोग संविधान विरोधी इस सरकार के खिलाफ एकजुट होकर सपा के साथ खड़े हैं। उन्हें मालूम है कि यदि इस बार भाजपा की सरकार आई तो संविधान को खत्म करने की साजिश तेज हो जाएगी और बहुजन समाज के लोगों को सारे अधिकार संविधान से ही मिले हैं। संविधान खत्म हुआ तो इनके अधिकार भी खत्म हो जाएंगे। इसलिए पिच्चासी फीसदी बहुजन समाज इस चुनाव में यूपी से भाजपा को उखाड़ फेंकेगा।

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