यूजीसी के नियम पर लगी रोक से मनुवादी ऐसे खुश हैं जैसे पाक से युद्ध जीत लिया

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सुप्रीम कोर्ट ने 19 मार्च तक रोके यूजीसी के नियम : उदितराज

लखनऊ। दलित, ओबीसी, माइनारिटीज, आदिवासी परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. उदितराज ने कहा कि अभी अभी भारत के कुछ मनुवादी पाकिस्तान से युद्ध जीतने जैसी ख़ुशी मना रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का ताज़ा फैसला आया कि यूजीसी के नियम को 19 मार्च तक रोका जाये। कुछ लोग ऐसे जश्न मना रहे हैं जैसे कोई बड़ी जंग की जीत हुई हो। जातीय नफरत से अधिक दुनिया में कोई हलाहल विष न होगा। इसका एक चौथाई ताकत पेपर लीक, निजीकरण के कारण नौकरियों का ख़ात्मा और महँगी शिक्षा के विरोध में लगाया होता तो कितनों का भला हो गया होता। इतनी नफरत दलित, पिछड़े और आदिवासी से, इन्हें कुछ न मिले चाहे देश पिछड़ा रहे या ख़ुद भिखारी बन जायें।

मंडल के पहले वीपी सिंह क्या थे और बाद में क्या हुए?

उन्होंने नब्बे के दशक की याद को ताजा करते हुए कहा कि मंडल के पहले वीपी सिंह क्या थे और बाद में क्या हुए?‘ राजा नहीं रंक है, भारत पर कलंक है’। यूजीसी के नियम को पढ़ा और ऐसी कोई बात नहीं है कि किसी एससी,एसटी और ओबीसी छात्र के शिकायत पर एक तरफा कार्रवाई हो जाए। तमाम भेदभाव को रोकने के लिए पहले से ही नियम और कानून हैं तो कितनों के खिलाफ फर्जी कार्रवाई हुई? उसी तरह से ये भी एक नियम है। ऐसे ही नहीं किसी सवर्ण के खिलाफ झूठी शिकायत पर कोई कार्रवाई होने वाली है। उसका मुख्य कारण है उच्च शिक्षा में कुलपति / हेड और प्रोफेसर आदि सवर्ण समाज से ही हैं। इस तरह से देखा जाये तो पॉस्को, रेप और दहेज $कानून यूजीसी नियम की तुलना में कई गुना धारदार हैं और एक तरफा कार्रवाई होती रहती है उसके ख़िलाफ तो कभी नहीं इतना विरोध किया?

यही लोग थे जब विदेशी आक्रमण हुआ करता था तो भी दलित- पिछड़ों को गले नहीं लगाए भले देश गुलाम होता रहा

2014 से रोजगार $गायब है और पढ़ाई महंगी हुई है और जितना विरोध यूजीसी के नियम का हो रहा है, उसका आधा भी किया होता तो सभी उचित शिक्षित को नौकरी मिल गई होती। पेपर लीक होने से लाखों का जीवन बर्बाद हो गया, अगर इस तरह से विरोध किए होते तो सबका भला होता। ख़ुद का भला हो या न लेकिन दलित और पिछड़ा का नहीं होना चाहिए। यही लोग थे जब विदेशी आक्रमण हुआ करता था तो भी दलित- पिछड़ों को गले नहीं लगाए भले देश गुलाम होता रहा।

बहुजन पूरी तरह जाग गया तो कहानी उल्टी हो जाएगी

कुछ यूट्यूबर और पत्रकार हैं जो विलाप कर रहे हैं, बहुजनों को इनका बहिष्कार कर देना चाहिए तब देखते हैं नोट कमा लेंगे। मंडल प्रथम और द्वितीय का विरोध कोई मुसलमान और ईसाई ने नहीं किया था और यूजीसी नियम का भी नहीं कर रहे हैं। मुसलमानों से लड़ाने और वोट लेने के लिए ही इन्हें हिंदू मानते हो। यही सोच रही तो देश की कभी तरक्की नहीं होगी और एक दिन जब बहुजन पूरी तरह जाग गया तो कहानी उल्टी हो जाएगी जैसे तमिलनाडु में हुआ । जिनका ज़र्रे ज़र्रें पर अधिकार था उन्हें तमिलनाडु ही छोडक़र भागना पड़ा। ऑक्सफैम और अन्य असमानता रिपोर्टों के अनुसार, भारत की संपत्ति में भारी असमानता है, जहां सामान्य वर्ग के पास लगभग 89 फीसदी संपत्ति है और दलित समुदाय के पास मात्र 2.6 फीसदी है। मनुवादी मानसिकता के लोग कुछ तो शर्म करो, कुछ तो देश के लिए सोचो, सब कुछ खा- पीकर बैठो हो और थोड़ा सा भी दलित, पिछड़ों और आदिवासी को मिल जाता है तो कुहराम मचा देते हो। अब आरएसएस कहां है जो सभी हिंदुओं के लिए रोते-धोते रहते हैं । दरअसल उन्हीं की विचारधारा वाले विरोध कर रहे हैं।

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