बुलडोजर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार शासन-प्रशासन पर कार्रवाई कब ? : फतेह बहादुर

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आरोप लगने मात्र से किसी की सम्पत्ति पर बुलडोजर कार्रवाई कितनी सही

अयोध्या जिले के पूराकलंदर क्षेत्र के भदरसा में किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म के बहुचर्चित मामले में आरोपी सपा नेता मोईद खान को सबूत के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया। यह फैसला विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम निरुपमा विक्रम ने बुधवार को सुनाया। मोईद के निर्दोष साबित होने के साथ ही अब यह बात तेजी से उठने लगी है कि आखिर किस आधार पर जिला प्रशासन ने मोईद के आवास को बुलडोजर से गिरवा दिया था। क्या इसके लिए जिम्मेदार शासन-प्रशासन पर कार्रवाई होगी । सामाजिक संस्था बहुजन भारत के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस कुंवर फतेह बहादुर का कहना है कि राज्य की ब्यूरोक्रेसी बुलडोजर नीति का गुणगान करते नहीं थकती। एक निर्दोष की सम्पत्ति पर बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया गया। क्या अब शासन-प्रशासन में बैठे जिम्मेदार लोग अपने इस कृत्य के लिए माफी मांगेंगे।

सपा नेता मोईद खान पर लगे दुष्कर्म के आरोप पाये गये गलत

उनका कहना है कि किसी व्यक्ति पर कोई भी व्यक्ति  कुछ भी आरोप लगा दे, ऐसे में तत्काल प्रभाव से जिला प्रशासन उसके आवास पर बुलडोजर की कार्रवाई शुरू कर देता है। इतना ही नहीं उसका मीडिया ट्रायल शुरू हो जाता है , जिससे उसके चरित्र की हत्या के साथ उसे आर्थिक नुकसान व मानसिक पीड़ा भी होती है। अब चूंकि मोईद खान को कोर्ट ने बरी कर दिया है तो उनका चरित्र हनन हुआ है उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा। कुंवर फतेह बहादुर ने कहा कि शासन स्तर पर इस तरह की नीति बने कि आरोप लगने मात्र से ही किसी के खिलाफ बुलडोजर की कार्रवाई न शुरू हो। अगर किसी ने कोई अपराध किया है तो उसे न्यायपालिका सजा देगी। न्यायपालिका के निर्णय का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मोईद के घर बुलडोजर चलवाने के जिम्मेदार शासन- प्रशासन तंत्र के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और महज आरोप लगने मात्र से किसी के खिलाफ बुलडोजर जैसी सख्त कार्रवाई न की जाए।

मुख्यमंत्री ने सदन में उठाया था मुद्दा

सपा नेता मोईद खान का नाम सामने आने पर यह मामला हाई प्रोफाइल हो गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे सदन में उठाया और सपा को कटघरे में खड़ा किया। सांसद अवधेश प्रसाद के साथ मोईद खान की फोटो दिखाकर राजनीतिक स्टंट चलाया गया। भाजपा समेत कई दलों के नेता पीडि़ता के घर गए। मोईद खान की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाया गया। उनका बहुमंजिला शॉपिंग कॉम्पलेक्स अवैध होने के कारण ध्वस्त कर दिया गया।

यह है मामला

गौरतलब है, यह मामला वर्ष 2024 में सामने आया था, जब अयोध्या के पूराकलंदर थाना क्षेत्र के भदरसा में एक 12 वर्षीय नाबालिग लडक़ी के साथ कथित गैंगरेप का आरोप लगा था। पीडि़ता के परिजनों ने आरोप लगाया था कि सपा नेता मोईद अहमद और उनकी बेकरी में काम करने वाले राजू खान ने नाबालिग को बेकरी में बुलाकर दुष्कर्म किया। आरोप यह भी था कि घटना का वीडियो बनाकर लडक़ी को ब्लैकमेल किया गया और महीनों तक उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया गया। जुलाई 2024 में जब पीडि़ता के दो महीने की गर्भवती होने की बात सामने आई, तब यह मामला उजागर हुआ।

पुलिस ने 30 जुलाई 2024 को मोईद अहमद और राजू खान को गिरफ्तार किया था। मामला सामने आते ही प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी। योगी सरकार ने कार्रवाई करते हुए मोईद अहमद की बेकरी सील कर दी थी और उनकी कथित अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलवाया गया था। दोनों आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट, गैंगरेप और ब्लैकमेलिंग जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की जांच के दौरान दोनों आरोपियों का डीएनए टेस्ट कराया गया। डीएनए रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने मोईद अहमद को बेगुनाह मानते हुए बरी कर दिया, जबकि राजू खान पर आरोप सिद्ध पाए गए।

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