मायावती के मुंह में अम्बेडकर और दिल में कमल : उदितराज

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यूजीसी का कानून लाने वाली सरकार ने ही इस पर रोक लगवा दी 

लखनऊ। दलित, ओबीसी, माइनारिटीज, आदिवासी परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. उदितराज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी के नियमों पर रोक लगाने के फैसले से सबसे ज्यादा मायावती खुश हैं। यूजीसी के नियम पर लगी रोक का बसपा प्रमुख ने सबसे पहले स्वागत किया। इससे साफ है कि मायावती के मुंह में अम्बेडकर और दिल में कमल है। मायावती ने नये नियम लागू करने के पक्ष में मजबूत पहल नहीं की। वैसे भी सरकार इस नये नियम को लाकर दलितों-पिछड़ा वर्ग के लोगों के साथ ही सवर्णों का भी रिएक्शन देखना चाहती थी। यही वजह रही कि सरकार ने पहले यूजीसी से नियम बनवाए और फिर आंदोलन करवाया। अंत में रोक लगवा दी, दोनों ख़ुश, फिर दोनों से वोट मांगो। सोशल मीडिया एक्स पर लिखे बयान में कहा कि मैंने सबसे पहले कहा था कि कोई साजि़श है वर्ना जो दलित-ओबीसी के विरोधी हों वो कहां से शुभ चिंतक हो गए।

सवर्णों की तरह दलितों को भी अभागा बनने का मौका दो

‘चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा,
राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा,
रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा ..।

डॉ. उदितराज ने कुमार विश्वास कविता पढ़ते हैं उसको शेयर करते हुए कहा कि अब दलित- पिछड़ों को भी सवर्णों की तरह अभागा बनने का मौका दे दो और बन जाओ डॉ. कुमार विश्वास भाग्यवान। इसमें जरा सा देर न करो। क्यों अभागा बने हो और अब ब्राह्मण का पेशा दलित, ओबीसी और आदिवासी को दे दो और दलित का पेशा चूहा खाना, सिर पर मैला ढोना, गंदी बस्ती में रहना, भूमिहीन, मरे जानवर को उठाना और खाल निकालना, नाली की सफाई, कपड़े की धुलाई, जूता साफ करना, मजदूरी करना आदि सम्मान का काम इसे फौरन धारण कर लो।

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