पीएम के साथ संसद में अनहोनी की आशंका की हो उच्च स्तरीय जांच

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रॉ, सीबीआई, आईबी के अफसरों की बने एसआईटी  : फतेह बहादुर

लखनऊ। सामाजिक संस्था बहुजन भारत के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस कुंवर फतेह बहादुर का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में वक्तव्य न देना दुखद और आश्चर्यजनक है। उन्होंने कहा कि आजाद भारत में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी प्रधानमंत्री ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपना वक्तव्य नहीं दिया है। उनका कहना है कि लोकसभा में प्रधानमंत्री के साथ किसी अनहोनी का अंदेशा होने की वजह से उसका लोकसभा में अपनी बात न रखना, ये प्रधानमंत्री और देश की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाता है।
बहुजन भारत के अध्यक्ष ने कहा कि संभवत: 2004 में यूपीए सरकार में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी अपना वक्तव्य लोकसभा में नहीं दे पाये थे, लेकिन उन्होंने ऐसा स्पीकर के आग्रह पर नहीं किया था, वह सदन में मौजूद थे और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपना वक्तव्य भी देना चाह रहे थे, लेकिन उस समय विपक्षी भाजपा ने उन्हें संसद में बोलने नहीं दिया था।

 

जांच में जो भी दोषी पाया जाए उस पर हो कठोरतम कार्रवाई

उन्होंने कहा कि ये देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला है, लिहाजा इस मामले में देश की सुरक्षा एजेंसी आईबी, सीबीआई, रॉ और सेना के अधिकारियों की एक एसआईटी गठित करके पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच करायी जाए और इस मामले में जो भी दोषी पाया जाए उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि जब देश की संसद (लोकसभा) में प्रधानमंत्री ही सुरक्षित नहीं है तो ऐसे में देश की सुरक्षा की स्थिति क्या होगी। प्रधानमंत्री के लोकसभा में वक्तव्य देने के लिए न आने की इस घटना की पूरे दुनिया में चर्चा हो रही है।

कुंवर फतेह बहादुर ने कहा कि लोकसभा की सारी व्यवस्था और सुरक्षा स्पीकर के नियंत्रण में है और संसद भवन की सुरक्षा सीआईएसएफ के हवाले है। ये फोर्स केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है। ऐसे में यह नहीं माना जा सकता कि हमारा देश इस स्थिति में पहुंच गया है कि वह अपने प्रधानमंत्री की लोकसभा के अंदर सुरक्षा न कर सके। उन्होंने कहा कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को दावा किया था कि पीएम मोदी के साथ सदन में कोई अप्रत्याशित घटना हो सकती थी। मैंने पीएम को सदन में आने से मना किया था। पीएम ने मेरे आग्रह को माना।

 

बिरला का यह कथन आज के संसदीय लोकतंत्र के लिए एक अभूतपूर्व घटना है। क्योंकि अभीतक यह नहीं सुना गया कि किसी पीएम ने किसी स्पीकर के इस तरह के अनुरोध पर लोकसभा में अपना वक्तव्य न दिया हो। उन्होंने कहा कि स्पीकर का यह कथन और देश के प्रजातंत्र और उसकी गरिमा पर कई सवाल खड़े करता है। क्या हमारा देश इस स्थिति में पहुंच गया है कि अब प्रधानमंत्री लोकसभा में खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। देश की सुरक्षा व्यवस्था, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है।

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