गांव की आंख-कान के साथ ही पुलिस की सूचना का मुख्य स्रोत भी है चौकीदार
लखनऊ। यूपी दैवीय आपदा प्रबंधन एवं जांच समिति के सभापति व सदस्य विधान परिषद डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि ग्राम चौकीदार भारत की ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी हैं। ये अंग्रेजी काल से चली आ रही परंपरा का हिस्सा हैं और आज भी पुलिस अधिनियम 1861 की धारा 47 के तहत काम करते हैं।

डॉ. निर्मल ने कहा किउत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इन्हें ग्राम प्रहरी नाम दिया गया है और इन्हें पुलिस बीट व्यवस्था से जोड़ा गया है। ये गांव की आंख-कान और पुलिस के लिए सूचना का मुख्य स्रोत होते हैं। डॉ. निर्मल ने कहा कि ग्राम चौकीदारों के मानदेय बढ़ाने के संबंध में उनकी मुख्यमंत्री जी से बात हुई है और उम्मीद है कि जल्दी ही इनका मानदेय बढ़ा दिया जाएगा। उनका कहना है कि आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने की सबसे अहम कड़ी ग्राम चौकीदार हैं। इसलिए इन पर गांव के साथ ही शहरों की सुरक्षा की भी जिम्मेदारी आ गयी है।
चौकीदार प्रदेश समिति द्वारा खुर्रमनगर में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. निर्मल ने कहा कि आज के दौर में केवल चौकीदार के सहारे ही पूरे गांव की निगरानी करना संभव नहीं है। ऐसे में जरूरी है कि चौकीदार के साथ ही गांववासी भी मिलकर अपने गांव की रक्षा करें। इसके लिए रात की पेट्रोलिंग के लिए संयुक्त प्रयास जरूरी है। साथ ही युवाओं को ‘सहायक ग्राम प्रहरी’ के रूप में शामिल करें। ताकि लोगों में चौकीदारों के काम के प्रति संवेदना पैदा हो। इस मौके पर चौकीदार प्रदेश समिति के प्रदेश अध्यक्ष अन्नू त्रिपाठी ने डॉ. निर्मल के समक्ष चौकीदारों की मांगों पर विचार करने को कहा। इस पर डॉ. निर्मल ने उन्हें भरोसा दिया कि वे ग्राम चौकीदारों की मांग को उच्चस्तर पर उठाएंगे। जल्द ही वे शासन में बैठे आलाधिकारियों के समक्ष उनकी मांग को रखेंगे।