वतन के सपूतों जागो और उठो

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लूट रहे इज़्ज़त ये सड़कों पे सरेआम, क्या उनकी बहन बेटियों का यही हाल है?

           यदुनाथ सुमन

देश के असभ्य माननीयों का कमाल है।
बहन बेटियों का कर रहे बुरा हाल है।
लूट रहे इज़्ज़त ये सड़कों पे सरेआम,
क्या उनकी बहन बेटियों का यही हाल है?

लफंगे ही दे दिए हैं लफंगों को अधिकार।
देश की आबरू को कर रहे हैं तार तार।
साम दाम दंड भेद से वतन लुटेरों का,
परिणाम देश में अब मचा है हाहाकार।।

स्वाभिमान सम्मान देश का कराह रहा।
देश के सपूतों वतन तुम्हें पुकार रहा।
उठो,मेरे वीरों फिर वतन को बचा लो,
वरना ये वतन फिर मुलामी में जा रहा।।

गद्दारों की साज़िश अगर सफल हो गई।
वतन सपूतों की कुर्बानी विफल हो गई।
इसीलिए प्यारे वतन के सभी भाइयों,
मिलके करो वतन के दुश्मन की विदाई।।

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