आरएसएस और भाजपा चले हैं विश्वगुरु बनने
लखनऊ। दलित, ओबीसी, माइनारिटीज एवं आदिवासी परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. उदितराज का कहना है कि आरएसएस और भाजपा के लोग समय-समय पर विश्वगुरु बनने का शिगूफा छोड़ते रहते हैं। मोहन भागवत जी ने फिर यही दोहराया और ये उस समय भी कहते रहे जब देश बार-बार गुलाम होता रहा। 81 देशों से करीब 24600 भारतीय 2025 में वहां से इंडिया भगाए (डिपोर्ट) किये गए उसमें .सबसे ज़्यादा सऊदी अरेबिया से है और उसके बाद अमेरिका। जातियों में बंटे समाज में एक गांव का गुरु बनना असंभव है और चले हैं विश्वगुरु बनने। खैर लोगों को मूर्ख बनाने के लिए झूठ- लफ्फाज़ी करने में क्या जाता है?
अम्बेडकर विरोधी संघ संविधान को नहीं मानता
डॉ. उदितराज ने कहा कि भाजपा और आरएसएस शुरू से भारतीय संविधान को नहीं मानता है। भागवत के बयान के बाद भाजपा में शामिल दलित, पिछड़े, आदिवासी तय करें वह संविधान के साथ हैं या मनुस्मृति के साथ हैं। उनका कहना है कि मोहन भागवत ने अपने बयान में कहा है कि ’भारत एक हिंदू राष्ट्र है, इसे संवैधानिक प्रमाण की जरूरत नहीं’ है। जबकि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर हिंदू राष्ट्र को भारतीय लोकतंत्र और समानता के लिए एक बड़ा खतरा मानते थे।
उन्होंने कहा कि भाजपा की चाकरी कर रहे दलित, पिछड़ा और आदिवासी समाज के नेताओं को इस पर अपना स्पष्ट मत देना होगा, अगर वे मोहन भागवत के इस बयान पर भी चुप रहते हैं तो यह माना जाएगा कि वह डॉ. अंबेडकर के साथ गद्दारी कर रहे हैं। उन्होंने बहुजन समाज के लोगों का आह्वान किया कि समाज के वे लोग जो भाजपा में हैं आपको जहां भी मिलें उनसे सवाल पूछें, जवाब न दें तो इनका बहिष्कार करें और ऐसे लोगों को संविधान विरोधी घोषित करें।
