संघ -भाजपा सदैव हिंदू धर्म व उसके सांस्कृतिक प्रतीकों को अपनी सत्ता की राजनीति के लिए सफलतापूर्वक इस्तेमाल करती आ रही
लखनऊ । यूपी के पूर्व अपर आयुक्त परिवहन अशोक कुमार का कहना है कि संघ -भाजपा सदैव हिंदू धर्म व उसके सांस्कृतिक प्रतीकों को अपनी सत्ता की राजनीति के लिए सफलतापूर्वक इस्तेमाल करती आ रही है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए अपनी विरोधी विचारधारा के संतों ,महाषुरुषों नायकों/ नायिकाओं का कुटिल नीति के अंतर्गत सांस्कृतिक प्रतीकात्मक स्वरूप में समरसता व समावेशी हिंदुत्व के नाम पर इन संतों /महापुरुषों के अनुयाइयों का राजनैतिक उपयोग ( संतों के नाम पर वोट हथियाना) करती आ रही है।
अशोक कुमार का कहना है कि यह सारी कवायद अंन्य राज्यों के साथ पंजाब, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए पंजाब में रविदसिया पंथ की सर्वोच्च संस्था” डेरा सचखण्ड के धार्मिक गुरु को प्रधानमंत्री पहले ही पदम अवार्ड से सम्मानित कर चुके हैं। अब देखना यह होगा संत रविदास स्थलों की अम्बेडकरवादी समितियां भाजपा के इस चुनावी अभियान का कैसे प्रतिकार करेंगी।

अशोक कुमार का कहना है कि इसी क्रम में संघ नीत भाजपा 29 जुलाई 26 ( गुरू पूर्णिमा) से 20 फरवरी 27 तक ‘ कलश यात्रा ‘ का आयोजन करने जा रही है जिसके अंतर्गत उक्त राज्यों में रविदसिया चमार / जाटव चमार बाहुल्य क्षेत्रों व वहां स्थापित धार्मिक मठों/ मंदिर में कलश पूजा ( हिंदू धर्म का सांस्कृतिक प्रतीक) का आयोजन किया जा सकता है।
अशोक कुमार का कहना है कि इस कार्य के लिए रविदास मंदिर/ मठों/आश्रमों के संचालकों/ पदाधिकारियों को appropriation नीति के अनुसार आर्थिक लाभ या अन्य लालच देकर वोट की राजनीत के लिए उन्हें उपयोग में लाया जायेगा।
उन्होंने कहा कि संघ की क्षेत्रीय सेवा भारती इकाई पहले ही इन बस्तियों में पहुंच चुकी है। देखना यह है कि दलित बहुल क्षेत्र की संत रविदास स्थलों की तमाम अम्बेडकरवादी समितियां भाजपा के इस चुनावी अभियान का कैसे या किस प्रकार प्रतिकार करती है।
