दलितों, पिछड़ों, महिलाओं व वंचितों के अधिकार भारतीय संविधान से ही सुरक्षित

आजमगढ़। सामाजिक संस्था बहुजन भारत ने बहुजन नायक कांशीराम जी की जयंती का आयोजन किया। इस मौके पर संस्था के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस कुंवर फतेह बहादुर ने कहा कि कुंवर फतेह बहादुर ने कहा कि कांशीराम जी की सोच थी कि दलित, शोषित, वंचित समाज को अधिकार मिले और यह 85 प्रतिशत का समाज है जो आपस में बिखरा हुआ है। इसे कैसे एकत्र किया जाय, उन्होंने इस समाज को एकजुट करने के लिए जगह-जगह कार्यक्रम कर अथक प्रयास किया।

कांशीराम जी कहते थे कि यदि आपको सत्ता प्राप्त करनी है तो हर व्यक्ति को अपना स्वार्थ छोड़कर निस्वार्थ भाव से एकजुट होना पड़ेगा , तभी 85 प्रतिशत को जोड़ पाएंगे। उन्होंने नारा दिया था कि जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी, अर्थात लोकतंत्र में जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व होना चाहिए। वोट हमारा राज तुम्हारा नहीं चलेगा नहीं चलेगा। इस समाज के लिए हर समस्याओं की कुंजी राजनीति है, जिससे सत्ता की प्राप्ति की जा सकती है जो कि बाबा साहब ने भी कहा था, राजनीतिक सत्ता एक ऐसी चाबी है जिससे सभी बंद दरवाजे खोले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि दलित,वंचित पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं तथा गरीबों की समस्त समस्याओं का समाधान भारतीय संविधान में ही निहित है।

आजमगढ़ जिले के मेंहनगर तहसील की बोगरिया बाजार में पूर्व उप सचिव देवचन्द राम के आवास पर आयोजित कांशीराम जी की जयंती समारोह में संस्था के अध्यक्ष ने कहा कि कांशीराम जी दलितों के मसीहा थे जिन्होंने शोषित, वंचित, दलित,पिछड़े, और , अल्पसंख्यक समाज को संगठित कर उन्हें संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया। उनकी मुख्य विचारधारा थी कि समाज को राजनीतिक शक्ति देकर सामाजिक न्याय स्थापित करना तथा शोषित, वंचित, और दलित समाज को संगठित करके उन्हें संवैधानिक अधिकारों के लिए जागरूक व अग्रसर करना। हमें कांशीराम जी के आदर्शों और उनकी विचारधारा पर चलकर एक बार फिर बहुजन समाज के लोगों को एकजुट करना होगा। इसलिए हमारी सबसे पहली जरूरत है जातियों में बंटे दलित, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज को एकजुट करके हमें न बिकने वाला और न टूटने वाला बहुजन समाज स्थापित करना होगा। जातियों में बंटे बहुजन समाज को कैसे जोड़ना है ये फार्मूला कांशीराम जी हमें बता गए हैं ।

कांशीराम जी ने केवल एक आंदोलन नहीं खड़ा किया था बल्कि आत्म सम्मान की क्रांति शुरू की थी : अनिरुद्ध सिंह
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि आज हम यहां एक ऐसे महान नेता की जयंती मनाने के लिए एकत्र हुए हैं। जिन्होंने भारत की सामाजिक और राजनीतिक चेतना को नई दिशा दी। कांशीराम जी’ की जयंती, यह दिन केवल जन्मदिन मनाने का नहीं है बल्कि उनके संघर्ष को याद करने और उनके अधूरे मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का है। आज जब हम उनकी जयंती मना रहे हैं तो हमें खुद से यह सवाल पूछना चाहिए क्या हम उनके मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं? क्या हम शिक्षित और संगठित हो रहे हैं? क्या हम अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं? अगर हम सच में उन्हें श्रद्धांजलि देना चाहते हैं तो केवल फूल चढक़र नहीं बल्कि उनके विचारों को अपने जीवन में अपना कर देनी होगी, याद रखिए कांशीराम जी ने केवल एक आंदोलन नहीं खड़ा किया था बल्कि आत्म सम्मान की क्रांति शुरू की थी यह क्रांति तब तक पूरी नहीं होगी जब तक समाज के आखिरी व्यक्ति को भी समान शिक्षा और समान अवसर नहीं मिल जाता !
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए तुलसी राम ने कहा कि काशीराम जी ने भारतीय संविधान में दिए गए समानता न्याय और अधिकारों के सिद्धांतों को समझ में लागू करने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों को जागरूक करने और उन्हें राजनीतिक शक्ति दिलाने के लिए संगठन बनाए, वक्ता के रूप में सुरेश राम, इंद्रदेव यादव, राम नवल पूर्व प्रमुख प्रतिनिधि मेंहनगर ने भी कांशीराम जी की जयन्ती पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के संयोजक देवचंद्र राम थे। संचालन लालसाराम पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने किया।
इस अवसर पर अरविंद यादव पूर्व जिला पंचायत सदस्य, रमेश चमार जिला पंचायत सदस्य रासेपुर, शिवानंद यादव प्रधान फुलाई ,लल्लन यादव पूर्व प्रधान फुलाइच, राम केवल प्रधान फिनिहिनि, राम नवल यादव प्रधान सराय भादी, रामप्रसाद जिला पंचायत सदस्य गोपालपुर, श्रीमती बबीता जिला पंचायत सदस्य कम्हरिया, बलवंत प्रधान पलिवार, एडवोकेट श्याम कन्हाई , एडवोकेट श्री दिलीप कुमार, एडवोकेट चन्दन कुमार, डॉ. तिलक धारी, रमाकान्त यादव परबन्धक , राम नाथ यादव पूर्व जिला पंचायत सदस्य बांसगांव, सन्तोष कुमार, सिधारी राम त्रिभुवन राम आदि सम्मानित प्रबुद्ध वर्ग समिलित हुए।