इतिहास से कुछ भी छुपाने और मिटाने की कीमत सदियों तक चुकानी पड़ती है
लखनऊ। दलित, ओबीसी, माइनारिटीज, आदिवासी परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. उदितराज ने कहा कि इतिहास से कुछ भी छुपाने और मिटाने की कीमत सदियों तक चुकानी पड़ती है और अब यही हो रहा । फ़्रांसिसी दार्शनिक मोंटेस्क्यू ने अरस्तू के गुलामी (सेलेवरी संबंधी विचारों को स्वीकार नहीं किया। अरस्तू ने अपनी पुस्तक पॉलिटिक्स में कहा था कि कुछ लोग ‘प्राकृतिक रूप से गुलाम’ होते हैं अर्थात वे स्वयं निर्णय लेने में सक्षम नहीं होते।

डॉ. उदितराज ने कहा कि मोंटेस्क्यू ने अपनी प्रसिद्ध कृति द स्प्रिट ऑफ द लॉ में इस विचार का विरोध किया और गुलामी को अन्यायपूर्ण तथा अमानवीय बताया। उन्होंने तर्क दिया कि कोई भी इंसान जन्म से गुलाम नहीं होता। यदि फ्रांस ने अरस्तू के विचारों को सुरक्षित न रखा होता, तो संभव है कि मोंटेस्क्यू गुलामी के विरुद्ध लिख और बोल न पाते तथा फ्रांसीसी क्रांति के प्रेरक न बनते। उदितराज ने कहा कि बीजेपी और आरएसएस असहज इतिहास को मिटाकर गलती कर रहे हैं। इतिहास की सही और गलत दोनों बातें आगे बढ़ने के लिए आवश्यक हैं। मुगलों का इतिहास हटाना, पुरुषवादी सोच, दलितों और पिछड़ों के शोषण को न पढ़ाना तथा जाति व्यवस्था के प्रतिकूल प्रभावों से बचना समाज के लिए घातक हो सकता है।
मोदी की बसपा पर नरमी की वजह क्या है?
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा कि पीएम मोदी ने नोएडा एयरपोर्ट का कल उद्घाटन किया। उन्होंने समाजवादी पार्टी की कड़ी आलोचना की, लेकिन बीएसपी पर नरमी दिखाई। जब मायावती जी कांग्रेस और एसपी पर लगातार हमला करती रहती हैं और सीएम योगी को धन्यवाद देती हैं तो मोदी जी को भी अपना फर्ज निभाना था। अंधभक्तों को जब तक यह बात समझ आएगी तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।