तथाकथित ‘रामराज्य’ में वर्ण व्यवस्था से तय किया जा रहा सम्मान : चन्द्रशेखर आजाद

Share

दलित होने की वजह से मंत्री असीम अरुण को अपनी ही सरकार में होना पड़ा अपमानित

नई दिल्ली। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रशेखर आजाद ने कहा कि यूपी के समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण के साथ योजी जी के राज में हुआ यह व्यवहार केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सत्ता के भीतर बैठी जातिगत मानसिकता का खुला प्रदर्शन है। उन्होंने कहा कि असीम अरुण दलित समाज से हैं, इसलिए नौकरशाही ने उनका खुलेआम अपमान किया। क्या ब्यूरोक्रेसी में कोई भी अधिकारी दलित या पिछड़ा वर्ग के नेताओं या मंत्रियों के अलावा किसी सवर्ण मंत्री के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार करने का साहस जुटा सकता है।

मंत्री के साथ योजी जी के राज में हुआ यह व्यवहार सत्ता के भीतर बैठी जातिगत मानसिकता का खुला प्रदर्शन

उन्होंने कहा कि समाज कल्याण विभाग के राज्य मंत्री जो खुद प्रशासनिक सेवा से आए एक अनुशासित अधिकारी रहे हैं उन्हें मुख्य अतिथि बनाकर बुलाया जाता है, लेकिन 45 मिनट तक इंतजार कराया जाता है, कार्यक्रम को किसी और के आने से जोड़ा जाता है, और अंत में उन्हें बिना कार्यक्रम के लौटना पड़ता है। यह कोई पहली घटना नहीं है। भूतपूर्व राज्यपाल और वर्तमान कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य जी के साथ भी आगरा में 8 सितंबर 2025 को यही प्रशासनिक असंवेदनशीलता देखने को मिली। किसान बैठक बुलाई गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी पहुंचे ही नहीं। नाराज होकर मंत्री को बैठक स्थगित करनी पड़ी। यानी तस्वीर साफ है एक जगह मंत्री को बुलाकर इंतजार कराया जाता है दूसरी जगह मंत्री के बुलाने के बावजूद अधिकारी किसानों की सुनवाई से दूर रहते हैं।

किसके इशारे पर चुनिंदा ब्यूरोक्रेट्स जनप्रतिनिधियों पर इतने हावी होते जा रहे

चन्द्रशेखर आजाद ने कहा कि आखिर किसके इशारे पर चुनिंदा ब्यूरोक्रेट्स जनप्रतिनिधियों पर इतने हावी होते जा रहे है? क्या इस तथाकथित ‘रामराज्य’ में संवैधानिक पदों का सम्मान भी अब वर्ण व्यवस्था से तय किया जा रहा है? सोचिए जो सरकार दलित समाज से आने वाले अपने ही मंत्रियों को सम्मान नहीं दे सकती तो आम दलितों-पिछड़ों का इस सरकार में क्या हश्र होगा?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *