सिर्फ प्रधान के इस्तीफे से बात नहीं बनेगी, छात्र-छात्राओं के साथ ज्यादिती करने वाले पुलिस अफसरों पर भी करें कार्रवाई

लखनऊ। कौमी मुशावरत के अध्यक्ष सैयद अबुल बरकात नजमी ने कहा है कि मोदी सरकार पहले ही केन्द्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ले लेना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि जब सरकार को लगा ये छात्र अपनी जायज मांगों को लेकर अडिग हैं और इन पर सरकार और पुलिस द्वारा की जा रही ज्यादितियों का भी कोई असर नहीं पड़ रहा है और काकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्त्ता पुलिसिया ज्यदिती के बावजूद शांतिपूर्ण तरीके से अपने आन्दोलन और अपनी मांग पर अड़े हैं और इस आन्दोलन को पूरे देश भर से आमजनता का सहयोग मिलने लगा है, इसी से घबराकर प्रधानमंत्री मोदी ने धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा ले लिया।
सैयद अबुल बरकात नजमी ने कहा कि आंदोलित छात्र-छात्राएं व सीजेपी कार्यकर्ता सरकार की ज्यादितियों और उत्पीडन के आगे नहीं झुके और अपनी जायज मांगों के समर्थन में आंदोलित रहे, जिसकी वजह से तानाशाही का पर्याय बन चुकी केंद्र की मोदी सरकार को छात्रों के आगे झुकना पड़ा।
उन्होंने कहा कि अब सरकार उत्पीडन करने वाले पुलिस के अधिकारीयों के खिलाफ भी कार्रवाई करे। जिस तरह से पुलिस ज्यदिती और बच्चियों के साथ पुलिस के बर्ताव व बल प्रयोग के वीडियो सोशल मीडिया पर आ रहे हैं, उससे तो पूरा देश स्तब्ध और शर्मिंदा है, लेकिन सरकार में बैठे आलाधिकारी और प्रधानमंत्री व उनके कैबिनेट के मंत्रियों को शर्म नहीं आई और उलटे पूरी सरकार प्रधान को बचाने में जुटी रही।
सैयद अबुल बरकात नजमी ने कहा कि देश और यूपी में जबसे भाजपा की सरकारें आयीं हैं तबसे छात्रों के साथ ही नहीं बल्कि समाज के गरीब तबके खासतौर पर दलितों, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज के खिलाफ अन्याय और उत्पीडन की घटनाएँ बढीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने यदि अपनी जुल्म-ज्यादिती गरीबों और वंचितों पर इसी तरह जारी रखी तो एक बार फिर से ये वर्ग सरकार के उत्पीडन के खिलाफ बड़ा आन्दोलन शुरू करेगा।