युवाओं का प्रदर्शन देश के खिलाफ़ साज़िश नहीं अपितु भ्रष्टाचार, पेपर लीक माफिया और सरकार से उनकी मिलीभगत उजागर करने का एक मात्र उपलब्ध तरीक़ा

लखनऊ। संविधान संरक्षण मंच के राष्ट्रीय संयोजक गौतम राणे सागर ने कहा कि वर्दी की इज़्ज़त देश के नागरिकों में सतत बनी रहे, जिम्मेदारी वर्दीधारियों पर है। यदि एक बार नागरिकों का वर्दी से विश्वास हट गया तब देश में अनर्थ हो जायेगा।
सरकार के खिलाफ़ प्रदर्शन देश के खिलाफ़ साज़िश नही अपितु भ्रष्टाचार, पेपर लीक माफिया, चंदा चोरी व घटिया स्तर के एक्सप्रेस वे निर्माण से देश की अर्थ व्यवस्था को दीमक की तरह जो लोग कुतर रहे हैं उन्हें चिन्हित करने और सरकार से उनकी मिलीभगत उजागर करने का एक मात्र उपलब्ध तरीक़ा है। प्रत्येक सजग नागरिकों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि देश को सशक्त रखने के लिए वह तत्पर रहे।
गौतम राणे सागर ने कहा कि संविधान और देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए बनाये गये सशस्त्र बल अपनी शक्तियों का प्रयोग जब देश के भविष्य नौजवानों के ऊपर लाठियां और वह भी मोटी कील ठुकी से ठुकाई करने लग जाए तब तो एक ही अर्थ निकलता है कि वह किसी भ्रष्टतम व्यक्ति के आदेश पर देश को गृह युद्ध में धकेलना चाहते हैं। पुलिस, पैरा फोर्सेस और मिलिट्री का गठन इसलिए नही हुआ है कि वह सही और गलत का विश्लेषण किये बिना ही किसी सनकी सत्ताधारी को ख़ुश करने के लिए छात्रों पर लाठियां भांजने लग जाए।
उन्होंने कहा कि फोर्स के लोगों तुम्हारी विश्वसनीयता ख़तरे में है। विश्वनीयता ही तुम्हारा कवच है। इस कवच को सहेज कर रखो। युवाओं को सौम्य नागरिक और देश की धरोहर ही रहने दो। नरभक्षी बनाने की साज़िश असहनीय है। तुम्हें लाठियां इसलिए नही दी गई हैं कि हर प्रदर्शन में इसे भांजकर आन्दोलन को कुचलने का प्रयास करो। लाठियाँ इसलिए दी गई ताकि भीड़ को लाठी का डर सताता रहे। बार बार भांजोगे तो लोगों में उससे लगने वाली चोट का भय ही ख़त्म हो जाएगा। भय ख़त्म होते ही उसे नरभक्षी बनने में देर नही लगेगी।