पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति तथा अल्पसंख्यक वर्ग के सर्वागीण विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार है भारतीय संविधान
आजमगढ़। जिला आजमगढ़ के विधानसभा क्षेत्र निज़ामाबाद की ग्राम पंचायत सरदहा विकास खण्ड -तहबरपुर में सामाजिक संस्था बहुजन भारत के तत्वावधान में प्रबुद्ध जन सम्मेलन एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के संयोजक दिनेश कुमार ने गोष्ठी की अध्यक्षता भी की। कार्यक्रम के व्यस्थापक विनोद कुमार यादव थे। कार्यक्रम प्रारंभ होने से पहले संगोष्ठी में उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने अपने स्थान पर खड़े होकर संविधान की शपथ ली।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं संस्था के अध्यक्ष व पूर्व आईएएस कुंवर फतेह बहादुर ने कहा कि भारतीय संविधान अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़ा वर्ग के सर्वागीण विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार है हमारे बीच जितनी समस्याएं हैं उन समस्याओं का समाधान केवल संविधान में ही है।
उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. आंबेडकर ने संविधान सभा के अंतिम भाषण में कहा था कि यह विश्व का सबसे अच्छा संविधान होगा यदि इसे लागू करने वालों की नीयत एवं मन्शा अच्छी होगी। यदि संविधान लागू करने वालों की मंशा व नीयत अच्छी नहीं है तो यह सबसे ख़राब संविधान साबित होगा। यह संविधान वही लागू कर सकता है जो सरकार में है और जिसके हाथ में सत्ता होगी। जब आपकी अपनी सरकार होगी तब आप संविधान को संविधान की मंशानुरूप लागू कर सकेंगे।
कुंवर फ़तेह बहादुर ने कहा कि आप जानते हैं कि सरकारों की स्थापना आपके वोट के द्वारा ही होती है यह वोट का अधिकार हमें संविधान ने दिया है, सत्ता की प्राप्ति वोट के माध्यम से ही संभव है। इसी सत्ता को बाबा साहब अंबेडकर और कांशीराम जी ने मास्टर चाभी कहा था और सत्ता की इस मास्टर चाभी से ही हमे सारे अधिकार प्राप्त होंगे एवं हमारी समस्याओं का निवारण होगा। इस मास्टर चाभी को प्राप्त करने के लिए जब दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक एकजुट होंगे तभी इसे प्राप्त कर पाएंगे।
उन्होंने कहा कि जब 1992 में बाबरी मस्जिद गिराई गयी और 1993 में यूपी में विधानसभा का चुनाव हुआ तब उस समय कांशीराम जी ने मुलायम सिंह यादव जी के साथ मिलकर पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक को एकजुट किया और चुनाव में संविधान विरोधी भाजपा को शिकस्त दी। यह सरकार 1995 में संविधान विरोधी ताकतों के षड़यंत्र का शिकार हो गयी और सपा-बसपा अलग-अलग हो गयी।
कुंवर फतेह बहादुर ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में जब सपा और बसपा फिर इकट्ठा हुई और यूपी में मिलकर चुनाव लड़ा, लेकिन संविधान विरोधी शक्तियों ने इन्हें ज्यादा दिनों तक एकजुट नहीं रहने दिया। एक महीने में बसपा ने इस गठबंधन को तोड़ दिया।
कुंवर फतेह बहादुर ने कहा कि इस गठबंधन को तोड़ने में मुख्य भूमिका संविधान विरोधी ताकतों की रही। इसका नतीजा यह हुआ कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सत्ता में आई, सपा दूसरे नंबर पर आई और बसपा को करारी हार झेलनी पड़ी। जिससे यह स्पष्ट होता है कि जब-जब दलितों, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के बीच बिखराव होगा तो इसका सीधा लाभ संविधान विरोधी ताकतों को मिलेगा।

उन्होंने कहा कि वह जानते हैं कि अगर यह दोनों एक साथ हो जाएंगे तो हम सब सत्ता पर कभी काबिज नहीं हो पाएंगे। यह हमें हमेशा ध्यान रखना होगा कि जो संविधान विरोधी ताकतें हैं वह दलितों, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज को एक नहीं होने देंगी। इन्हें अलग-अलग करने के लिए हर संभव साजिश करती रहेंगी , इससे बहुजन समाज के लोगों को हमेशा सजग एवं सतर्क रहना होगा।
2024 के लोकसभा चुनाव में संविधान विरोधी ताकतों का मनोबल इतना बढ़ा कि उनके लोग कहने लगे कि अगर 400 सीट मिल गई वे संविधान बदल देंगे। इसका प्रभाव दलितों, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज पर पड़ा।
उन्होंने मिलकर संविधान विरोधी ताकतों के विरुद्ध इण्डिया गठबंधन में शामिल सपा और कांग्रेस को वोट किया जिसकी वजह से सपा की 37 सीट आई और कांग्रेस को 6 सीट मिली। और इसी का परिणाम था कि भाजपा को लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया।

कुंवर फ़तेह बहादुर ने कहा कि जो लोग संविधान का विरोध कर रहे हैं अगर उनके साथ हमारा भाई भी है तो वह अधर्म का साथ दे रहा है। हमें अधर्म के साथ खड़े किसी भी व्यक्ति का साथ नहीं देना है चाहे वह हमारा भाई या परिवार का सदस्य ही क्यों ना हो।
उन्होंने कहा कि लेकिन यह ख़ुशी की बात है पीडीए समाज संविधान विरोधियों के खिलाफ मजबूती से लड़ रहा है और संविधान का समर्थन करने वाला पीडीए समाज पिछले लोकसभा चुनाव में संविधान बचाने की लड़ाई लड़ रहे सपा-कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़ा रहा, जिसकी वजह से चुनाव में जीत संविधान का साथ देने वालों की हुई यानि धर्म का साथ देने वालों की हुई।
उन्होंने कहा कि सभी को संविधान से सारे अधिकार मिले हैं खासतौर पर दलित, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज के अधिकारों की रक्षा संविधान से ही होती है, ऐसे में संविधान ख़त्म करने की बात करने वाले लोग कमजोर के अधिकारों को छीनने की बात करते हैं और कोई भी धर्म कमजोर के अधिकार छीनने की इजाजत नहीं देता।

कुंवर फ़तेह बहादुर ने कहा कि संविधान विरोधी लोग तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। कैसे आपका अधिकार सीमित किया जाए और आपके वोट के अधिकार को खत्म किया जाए। अब हम लोगों को यह भी देखना पड़ेगा कि बाबा साहब ने जो वोट का अधिकार दिया है उस वोट के अधिकार में इतनी शक्ति है कि जिससे हम सत्ता की प्राप्ति कर सकते हैं। हम अपने वोट की ताकत से बच्चों के भविष्य का निर्माण कर सकते हैं, उस वोट को इतने सस्ते में किसी को ना दें। जैसे 5 किलो राशन मिल गया और ₹10000 मिल जाए तो उससे खुश होकर अपने वोट का सौदा ना करें।
कुंवर फ़तेह बहादुर ने कहा कि हम पीडीए की एकता को मजबूत बनायें ताकि यूपी में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में सत्ता प्राप्त कर सकें, जिससे संविधान के अनुसार पीडीए समाज के मान-सम्मान और उनके अधिकार की प्राप्ति के लिए काम किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांशीराम जी का बहुजन समाज और अखिलेश यादव जी का पीडीए समाज दोनों एक ही है, इसलिए दलितों, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों को इससे भ्रमित होने की जरूरत नहीं है।

संविधान की सबसे जरूरत PDA समाज को ही है, क्योंकि जब संविधान रहेगा तभी PDA समाज के अधिकार रहेंगे : अनिरुद्ध सिंह
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि जब देश आजाद हुआ तब भारतीय समाज में गहरी असमानता थी। लोगों को उनकी जाति, धर्म और आर्थिक स्थिति के आधार पर बांटा गया था। ऐसे समय में बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी द्वारा दिए गए संविधान ने यह सुनिश्चित किया कि भारत का लोकतंत्र केवल कुछ लोगों का नहीं बल्कि हर नागरिक का लोकतंत्र होगा एक ऐसा लोकतंत्र जो न्याय समानता और सम्मान पर आधारित होगा भारत का संविधान एक तरह से करोड़ों वंचितों शोषितों और उपस्थित लोगों के सपनों का घोषणा पत्र है।
अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि यह उन लोगों की आवाज है जिन्हें सदियों तक सामाजिक और आर्थिक अधिकारों से दूर रखा गया। अगर संविधान ना होता तो शायद समाज के कमजोर वर्ग आज भी हाशिये पर होते। यह उन लोगों की आवाज है जिन्हे सदियों तक सामाजिक और आर्थिक अधिकारों से दूर रखा गया विशेष रूप से (PDA) समाज जिसमें पिछड़े दलित और अल्पसंख्यक समुदाय आते हैं उनके लिए संविधान सुरक्षा और सम्मान का सबसे बड़ा आधार बना हमें सोचना होगा, आत्म चिंतन करना होगा क्या हमारा लक्ष्य केवल मुफ्त अनाज लेना है या फिर अपने संवैधानिक अधिकारों के दम पर सत्ता और संसाधनों में बराबरी की भागीदारी हासिल करना है।
संविधान की सबसे जरूरत PDA समाज को ही है। क्योंकि जब संविधान रहेगा तभी PDA समाज के अधिकार रहेंगे। इसलिए साथियों इन मुट्ठी भर संविधान विरोधी ताकतों को सत्ता से बाहर निकलने का समय आ गया है और उसका तरीका हम सबके सामने पहले से मौजूद है।
अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि मान्यवर कांशीराम जी ने जो 15-85 का फार्मूला दिया वह आज भी सत्ता पाने की चाभी है। जिसके अनुसार भारत में 85% लोग PDA समाज से आते हैं। जिसमें पिछले, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय आते हैं अगर यह संगठित हो जाए और यह खुद सत्ता में हो तो वह अपने विकास और भविष्य को खुद सुरक्षित कर सकेंगे अच्छी शिक्षा अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं और सम्मानजनक रोजगार पा सकेंगे। इसलिए एक बार फिर हमें PDA समाज को शिक्षित करना होगा संगठित करना होगा और फिर जब साथ में मिलकर संघर्ष करना होगा तब जाकर PDA को राजनीतिक शक्ति मिल पाएगी।

अंत में एक बार फिर हम अपने युवा भाइयों और बहनों से कहना चाहते हैं कि वह आगे आयें और हम लोग कंधे से कंधा मिलाकर चलें आपकी ऊर्जा मेहनत और संकल्प से हम एक बेहतर और मजबूत समाज का निर्माण कर सकते हैं। साथ ही मैं अपने बुजुर्गों और वरिष्ठ जनों से विनम्र निवेदन करता हूं कि वह हमें अपना आशीर्वाद और मार्गदर्शन देते रहे। आपका अनुभव और स्नेह ही हमारी सबसे बड़ी प्रेरणा और शक्ति है। जय भीम जय संविधान जय हिंद।
संगोष्ठी को जीएस प्रियदर्शी, राजबली पूर्व ऑडिटर, डॉ. एसआर सरोज, तुलसीराम सेवानिवृत्ति राज्य निर्वाचन आयुक्त उत्तराखंड, डॉ लच्छन, वीरेन्द्र कुमार, रामप्रताप यादव आदि लोगों ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन बुद्धिराज ने किया। कार्यक्रम स्थल पर विनोद कुमार यादव, राजाराम कवि सुरेश यादव पूर्व प्रधान राजेश कुमार तहबरपुर, मेवालाल, सुभाष राम, वीरेंद्र कुमार, उमाशंकर यादव, ओपी यादव, सत्यदेव, चंद्रजीत, राजू, नयन, सूरज कुमार, दयाराम, हीरालाल, नारायण, मंसाराम, कलंदर, किरण भारती, सोनी, प्रभावती, रीता, संगीता, डॉक्टर तिलकधारी, सिधारी राम मानपुर, राजकुमार यादव, सचिव, जयराम यादव अतुल कुमार, एडवोकेट राजकुमार आदि उपस्थित रहे।
