दलित उत्पीड़न के मुद्दे पर आखिर एकजुट कब होंगे हमारे माननीय : चिंतामणि

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कानपुर के सचेंडी में दलित युवक को जूते में पानी पिलाने वाली घटना ने पूरे समाज को किया शर्मसार 

लखनऊ। सामाजिक संस्था बहुजन भारत के महासचिव चिंतामणि  ने कहा कि दलितों में सामाजिक एकता के अभाव का ही नतीजा है कि आज यूपी के विभिन्न जिलों में दलित उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रहीं हैं।

उनका कहना है कि और हम लोगों में एकजुटता न होने की वजह से उत्पीड़ित लोगों की थाने-चौकियों में सुनवाई भी नहीं हो रही है।

पुलिस उन्हीं मामलों में सुनवाई करती है जो मामला समाचार पत्रों या सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा हाईलाइट होता है।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में भी पुलिस आरोपियों के खिलाफ देर से और हल्की धाराओं में कार्रवाई करती है।

इस समय दलितों पर उत्पीडऩ की घटनाएं सामान्य बात हो गई हैं, लेकिन हमारे नेता दलित उत्पीडऩ के साथ ही दलित हितों के मुद्दे भी नहीं उठा रहे हैं।

उत्पीड़न करने वालों के खिलाफ नहीं की जा रही कोई कार्रवाई भी 

चिंतामणि का कहना है कि कानपुर नगर के सचेंडी थाना क्षेत्र में दलित किशोर ने संजय राजपूत की बाल्टी से पानी ले लिया तो उसे न केवल प्रताडि़त किया गया, पहले उसे पीटा गया, बाद में जूते में थूककर उसे चटाया गया और बाद में उसी जूते में पानी भरकर उसे पिलाया गया।

इतने से उनका मन नहीं भरा तो दलित किशोर को निर्वस्त्र करके पूरे क्षेत्र में घुमाया गया, इसके बावजूद क्षेत्र के सामाजिक संगठन और दलितों की रहनुमाई करने वाले नेता शांत हैं।

उन्होंने कहा कि आये दिन समाचार पत्रों में दलितों एवं दलित महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं पढऩे को मिल रहीं हैं जिनको देखकर मन उद्वेलित होता है, लेकिन इन घटनाओं को पढकर भी हमारे समाज के लोग एकजुट क्यों नहीं हो रहे और हमारे समाज के जनप्रतिनिधि भी आवाज नहीं उठा रहे हैं। कानपुर के सचेंडी की यह घटना कोई पहली घटना नहीं है।

शिकोहाबाद में दलित युवक को इतना ज्यादा प्रताड़ित किया गया कि उसने आत्महत्या कर ली। दलित महिलाओं के साथ दुराचार की घटनाएं तो आम बात होती जा रही है। पिछले दिनों लखनऊ के एक मंदिर में एक दलित बुजुर्ग को पेशाब चटवायी गयी, बावजूद इसके हम उत्पीड़न की घटनाओं के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने के लिए भी एकजुट नहीं होते।

हमारे जनप्रतिनिधि सरकार के मुखिया के सामने दलित उत्पीडऩ के खिलाफ अपनी बात रखने का साहस कब जुटा पाएंगे

संस्था के महासचिव ने कहा कि संविधान और आरक्षण का विरोध करने वाली ताकतें दलितों को इंसान नहीं समझती हैं और वह एक बार फिर देश में गैरबराबरी के आधार पर सामाजिक व्यवस्था स्थापित करना चाहती हैं।

हमें ऐसे संविधान विरोधी और आरक्षण विरोधी ताकतों के साथ ही दलित विरोधी शक्तियों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना होगा और जो लोग संविधान और आरक्षण बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

हमें उनका साथ देना होगा क्योंकि जिस समाज की सरकार होती है, उस समाज का उत्पीड़न नहीं होता। यह बहुजन नायक कांशीराम जी ने करके दिखा दिया है। मौजूदा हालात में राज्य में सपा और कांग्रेस ही आरक्षण और संविधान बचाने की लड़ाई लड़ रही है।

ब्राह्मण समाज के विधायक व मंत्रीगण ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए बिगुल फूंका

चिंतामणि ने कहा कि राज्य के सत्ताधारी दल में ही ब्राह्मण समाज के विधायक व मंत्रीगण ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए बिगुल फूंका, एकजुट होकर अपने अधिकार की लड़ाई लड़ी और सफल हुए।

यूपी में सबसे ज्यादा दलित विधायक सत्ताधारी दल के हैं, आखिर ये दलित समाज के खिलाफ हो रहे उत्पीडऩ एवं आरक्षण आदि दलित हितों के मुद्दों पर आपस में बैठकर चर्चा क्यों नहीं करते।

आखिर हमारे प्रतिनिधि सरकार के सामने दलित उत्पीड़न के खिलाफ अपनी बात रखने का साहस कब जुटा पाएंगे। हमारे जनप्रतिनिधियों को समाज पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद करनी होगी, जिस दिन इन्होंने अपनी बात सरकार के सामने रखने का साहस जुटा लिया, उसी दिन से दलित उत्पीड़न की घटनाएं कम होने लगेंगी एवं नियमानुसार आरक्षण दिये जाने की बात भी मानी जाने लगेगी।

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