अस्पताल के स्थापना दिवस में शामिल होंगे डिप्टी सीएम पाठक

बलरामपुर अस्पताल में इलाज की व्यवस्था डिजिटल की जायेगी। जिसके तहत मरीजों का पंजीकरण, ओपीडी पर्चा, जांच रिपोर्ट, दवाओं की जानकारी और इलाज से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा। डिजिटल सिस्टम से मरीजों को लंबी कतारों से राहत मिलेगी और डॉक्टरों को भी इलाज में आसानी होगी। निदेशक डा. कविता आर्या ने अस्पताल के स्थापना दिवस के बारे में बताया। उन्होंने चिकित्सालय में विगत वर्षो में किये गये कार्यों की जानकारी भी दी। मंगलवार यानि तीन फरवरी को अस्पताल अपनी स्थापना के 157 वर्ष पूरे कर लेगा।
इलाज की व्यवस्था को ऑनलाइन करने की की जा रही कोशिश
डा. आर्या ने बताया कि बीते कुछ सालों में अस्पताल में मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी। बीते एक साल में करीब 10 लाख नये मरीज ओपीडी में देखे गये,जबकि कुल ओपीडी संख्या करीब 35 लाख रही। इसी दौरान इमरजेंसी में 1.25 लाख मरीजों को उपचार दिया गया। उन्होंने बताया कि एक साल में 48 लाख पैथोलॉजी जांच और 9,915 सीटी स्कैन व 30,000 अल्ट्रासाउंड किये गए हैं। जबकि आईपीडी (भर्ती मरीज) 43,682 रही। मरीजों को इलाज के लिए लम्बी कतारें न लगानी पड़े, इसके लिए धीरे-धीरे इलाज की व्यवस्था को ऑनलाइन करने की कोशिश की जा रही है। मरीजों को घर बैठे डॉक्टर को अपॉइंटमेंट मिल सके, इसके लिए ओपीडी के पंजीकरण ऑनलाइन किया जा रहा है। डा. आर्या ने बताया कि आने वाले वर्ष में पीजीआई की तर्ज पर पूरी व्यवस्था को डिजिटल किया जाएगा, जिससे पर्ची कंप्यूटर पर बनेगी और जांच रिपोर्ट भी सीधे सिस्टम पर उपलब्ध होंगी।
बढ़ाई जा रही डायलिसिस यूनिट की क्षमता
निदेशक ने बताया कि किडनी मरीजों को उपचार में देरी न हो इसके लिए डायलिसिस यूनिट की क्षमता भी बढ़ाई जा रही है। पहले 7 डायलिसिस मशीनें थी जो अब बढ़ाकर 15 कर दी गयी हैं। मशीनें बढऩे के साथ अधिक मरीजों को इसका लाभ भी मिला। इस साल करीब 20 हजार मरीजों की डायलिसिस की गयी।मरीजों को बिजली व्यवस्था निर्बाध रूप से मिल सके इसके लिए अस्पताल की छतों पर 650 किलोवॉट के सोलर पैनल लगवाए गए हैं। इससे हर महीने करीब साढ़े पांच से छह लाख रुपये की बिजली का उत्पादन होगा। वहीं, वार्ड 11 में मरीजों को एक से दूसरे तल पर शिफ्ट करने के लिए लिफ्ट लगाई गई है। लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट भी जल्द ही चालू किया जाएगा।