भाजपा नेतृत्व की मंशा महिलाओं को राजनीति में ज्यादा भागीदारी देने की है, तो इसे लागू करने में संविधान में संशोधन करने की कोई जरूरत नहीं

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं यूपी के पूर्व राज्यमंत्री सलाहउद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी राजनीति में महिला आरक्षण के नाम पर महिलाओं को भ्रमित कर रही है।
उन्होंने कहा कि अगर भाजपा नेतृत्व की मंशा महिलाओं को राजनीति में ज्यादा भागीदारी देने की है, तो इसे लागू करने में संविधान में संशोधन करने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि महिलाओं को चुनावों में ज्यादा टिकट देने और उन्हें ज्यादा भागीदारी देने के लिए किसी भी तरह की कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है।
महिला आरक्षण के नाम पर सिर्फ राजनीति कर रही भाजपा
सलाहउद्दीन ने कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर भाजपा सिर्फ राजनीति कर रही है। इनका मकसद महिलाओं को राजनीतिक आरक्षण देना नहीं है। यही वजह है कि गुरुवार को यूपी की भाजपा सरकार ने विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाकर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया।
जबकि सरकार को एक प्रस्ताव पारित करके केन्द्र सरकार को भेजना चाहिए कि जब महिलाओं के लिए तेतीस फीसदी आरक्षण का बिल संसद के दोनों सदनों में पारित हो गया है तो इसे तत्काल लागू किया जाए।
भाजपा अपनी पार्टी से महिलाओं को पचास फीसदी या नब्बे फीसदी टिकट दे
सपा नेता ने कहा कि अगर महिलाओं को सियासत में ज्यादा भागीदारी देने की भाजपा नेतृत्व की दृढ़ इच्छा है तो कोई भी दल उसमें बाधक नहीं है।

उनका कहना है कि भाजपा राजनीति में महिलाओं को आरक्षण देने के नाम पर सिर्फ राजनीति कर रही है। सलाहउद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि भाजपा अपनी पार्टी से महिलाओं को पचास फीसदी या नब्बे फीसदी टिकट दे दे। विपक्ष इसका तो विरोध नहीं कर रहा है।
भाजपा नेतृत्व महिलाओं के लिए अपने दल से लोकसभा व विधानसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा टिकट देकर एक आदर्श स्थापित करे, जिससे विपक्षी दलों को भी अपनी पार्टी से महिलाओं को अधिक से अधिक देने के लिए मजबूर होना पड़े, लेकिन भाजपा को महिलाओं को राजनीति में हिस्सेदारी नहीं देनी है बल्कि महिलाओं का वोट पाने के लिए महिला आरक्षण के नाम पर राजनीति करनी है। अब देश की महिलाएं भी इस बात को समझने लगी हैं।
भाजपा पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को उनकी आबादी के मुताबिक आरक्षण नहीं देना चाहती
सलाहउद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि वास्तविकता यह है कि केन्द्र की भाजपा सरकार ने 2023 में संसद में महिला आरक्षण विधेयक पारित करा लिया था, उस समय विपक्ष इसे 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में लागू करने की बात कर रहा था, तब भाजपा ने यह कहकर मना कर दिया था कि पहले जनगणना और परिसीमन होगा उसके बाद महिला आरक्षण लागू होगा।
अब यही भाजपा कह रही कि जनगणना और परिसीमन की जरूरत नहीं, इसे तत्काल लागू किया जाए। जबकि वास्तविकता यह है कि बिना जातीय जनगणना के यह कैसे पता चलेगा कि पिछड़ा वर्ग की महिलाओं की कितनी आबादी है। भाजपा दलित, पिछड़ा वर्ग की महिलाओं का राजनीतिक हक छीनने के लिए ही जल्दबाजी में इस संशोधन विधेयक को लागू करना चाहती थी। भाजपा नेतृत्व को इस बात का अंदाजा है कि अगर जातीय जनगणना हो गयी तो दलित व पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को उनकी बढ़ी हुई आबादी के मुताबिक सीटें आरक्षित करनी पड़ेंगी। जबकि वास्तविकता यह है कि भाजपा पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को उनकी आबादी के मुताबिक आरक्षण नहीं देना चाहती है।