इन्सान के मन में कितनी खोट हो गई सीधा-सादा था मैं इसलिए चोट हो गई : मो. रफीक सलमानी (मामू)

गाँव की बात है समय था शाम का राही आता दिखाई दिया अन्जाने धाम का हमने…