हमारी संस्था सांप्रदायिकता के खिलाफ भाईचारा और अमन का पैगाम देने में कामयाब
लखनऊ। सामाजिक संस्था कौमी मुशावरत के अध्यक्ष सैयद अबुल बरकात नजमी का कहना है कि इस संस्था का गठन समाज में सांप्रदायिक सौहार्द को कायम रखने के मकसद से ही किया गया है। हमें इस बात की खुशी है कि हमारी संस्था अपने इस मकसद में कामयाब रही है। हमारी संस्था इंसानियत की बात करती है, जिलों-जिलों में सेमिनार, सभाएं और गोष्ठïी करके हमारी संस्था सांप्रदायिकता के खिलाफ भाईचारा और अमन का पैगाम देने में सफल है।

सांप्रदायिकता के खिलाफ हम कोई उग्र आंदोलन नहीं चला रहे बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए आपसी एकता के प्रयास कर रहे हैं और इसमें हमें सफलता भी मिल रही है। हालांकि यूपी के मौजूदा हालात बहुत अच्छे नहीं हैं। सांप्रदायिक ताकतें हिन्दू-मुस्लिम करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ती हैं। बावजूद इसके राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बना हुआ है। तमाम प्रयासों के बावजूद सांप्रदायिकता को हवा देने वाले संगठन अपने इस मंसूबे में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं।
कौमी मशावरत सांप्रदायिक सौहार्द कायम रखने के पक्षधर संगठनों के साथ काम कर रही
इसकी मुख्य वजह है कि समाज के दोनों पक्ष में सामाजिक सौहार्द स्थापित करने को लेकर उनकी समझ बढ़ी है और वे लडऩे के बजाय आपस में मिलकर रहना पसंद कर रहे हैं। नजमी ने कहा कि उनकी संस्था सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द कायम रखने के पक्षधर सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर काम कर रही है। किसी भी सियासी दल के साथ मिलकर काम नहीं कर रही है, उन्होंने कहा कि जो भी दल संविधान सम्मत बात करते हैं, या संविधान के मद्देनजर कोई प्रस्ताव देते हैं, हम उसे मानते हैं। क्योंकि देश संविधान से चलता है और भारतीय संविधान में देश के गरीबों, मजलूमों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के सारे अधिकार निहित हैं।