जल्द ही मुख्यमंत्री योगी जी से मिलकर इन गांवों का नाम बदलाने का आग्रह करेंगे
लखनऊ। यूपी अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष एवं सदस्य विधान परिषद डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने जालौन जिले में एक गांव का नाम चमारी होने पर अचरज जताने के साथ ही आपत्ति भी जताई है। उनका कहना है कि आजादी के 79 साल बाद भी किसी गांव का नाम चमारी होना इस बात का संकेत है कि वहां रह रहे मानिंद लोगों को भी इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इसी गांव में लल्लन टॉप के लव्य प्रतिष्ठित पत्रकार सौरभ द्विवेदी जी भी रहते हैं, लेकिन यह नाम उन्हें कभी चुभा नहीं।

गांधी और अम्बेडकर में एक अंतर यह भी था कि गांधी ने कभी दलितों का दर्द नहीं झेला था जबकि डॉ. अम्बेडकर ने दलितों के दर्द को जिया था
डॉ. निर्मल ने कहा कि गांधी और डॉ. अम्बेडकर में एक अंतर यह भी था कि गांधी ने कभी दलितों का दर्द नहीं झेला था जबकि डॉ. अम्बेडकर ने दलितों के दर्द को जिया था। उन्होंने कहा कि उन्हें पूर्व आईपीएस देवी सिंह अशोक जी का पत्र प्राप्त हुआ, उससे उन्हें इस बात की जानकारी मिली। डॉ. निर्मल ने कहा कि उन्हें यह भी बताया गया कि उन्नाव जिले में भी चमरौली गांव है। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मुलाकात करके इन गांवों का नाम बदलने का आग्रह करेंगे।