संविधान के अनुच्छेद 49 में किसी भी आस्था के स्थल को पूर्ण संरक्षण देना सरकार की कानूनी बाध्यता : आरके गौतम
लखनऊ। सक्रिय अंबेडकर अनुयाइयों की एक आपातकालीन बैठक एम.के. अपार्टमेंट ए.पी. सेन लेन (चारबाग) में हुई। बैठक में डॉ. अंबेडकर महासभा को ऐशबाग में शिफ्ट करने के साथ ही यहां स्थापित बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के पवित्र अस्थिकलश को सरकार द्वारा हटाने की हो रही कोशिश का विरोध किया गया।

बैठक में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि डॉ. आंबेडकर महासभा 10 विधानसभा मार्ग लखनऊ के प्रांगण में इस वर्ष 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती का आयोजन रखकर मुख्यमंत्री के सामने कुछ स्वार्थी और भ्रमित किस्म के तत्वों द्वारा वहां स्थापित बाबा साहब का अस्थि कलश, बौद्ध बिहार और तथागत बुद्ध और बाबा साहब की प्रतिमाओं के साथ पूरे डा. अंबेडकर महासभा के कैंपस को जुलाई 2026 तक ध्वस्त करने का ऐलान किया गया। निश्चित ही ये दुनियाभर में बुद्ध और अंबेडकर के अनुगामियों को खुलेआम आघात और उनकी आस्था पर आक्रमण पहुंचाना है।
अस्थि कलश, बुद्ध बिहार और उसमें स्थापित दोनों पवित्र प्रतिमाओं को ध्वस्त करने की साजिश के विरोध में संघर्ष के लिए रहें तैयार
भारत के संविधान के अनुच्छेद 49 में स्पष्ट प्रावधान है कि किसी भी आस्था के स्थल, श्रद्धा केंद्र एवं ऐतिहासिक महत्व की किसी भी राष्ट्रीय धरोहर को पूर्ण संरक्षण प्रदान करना प्रत्येक लोकप्रिय सरकार की कानूनी बाध्यता है।तदनुसार विश्व वंदनीय एवं ज्ञान के प्रतीक डा. बाबा साहब अंबेडकर के अस्थिकलश को कोई भी शक्ति कानूनन खुर्द- बुर्द नहीं कर सकती है।
बैठक में बाबा साहब के अनुयायियों से अपील की गयी कि अस्थि कलश, बुद्ध बिहार और उसमें स्थापित दोनों पवित्र प्रतिमाओं को ध्वस्त करने की साजिश के विरोध में संघर्ष हेतु मजबूती से तैयार रहना है।

बैठक में डा. बीपी अशोक, केके गौतम, दयासागर बौद्ध ,डा. राजारमन आनंद, साहब सिंह धनगर भैय्पाजी, भारत सिंह, पंकज प्रसून एड, दिनेश सिंह पटेल,, इंजी. भीमराज, आरके गौतम, राम लगन यादव, जनक प्रसाद, जीत लाल सैनी, दयाराम बौद्ध एडवो, दशरथ मौर्य, प्रमोद कुमार, राधेश्याम, सुरेश चंद्र गौतम,पी.सी.कुरील व लाखन सिंह जाटव आदि लोग मौजूद थे।
