यूपी में असपा से मिलकर चुनाव लड़ेगी पॉलिटिकल जस्टिस पार्टी
कमल जयंत
पॉलिटिकल जस्टिस पार्टी के संस्थापक डॉ. बीपी अशोक का कहना है कि बहुजन समाज के हितों को ध्यान में रखकर हमने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) से गठबंधन किया है। उनका कहना है कि इस गठबंधन का मकसद बहुजनों के साथ हो रहे अन्याय व अत्याचार के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ना है कि ताकि इन्हें न्याय दिलाया जा सके। उनका कहना है कि राज्य की भाजपा सरकार में खासतौर पर दलितों का उत्पीड़न बढ़ा है। इस वर्ग के अधिकार छीने जा रहे हैं। दलितों व पिछड़ा वर्ग के लिए संविधान में प्रदत्त आरक्षण को भाजपा सरकार एक साजिश के तहत खत्म करती जा रही है।

राज्य में कर्मचारियों का चयन अब आउटसोर्सिंग के जरिए हो रहा है और आउटसोर्सिंग व्यवस्था में आरक्षण लागू नहीं है। भाजपा की चाहे केन्द्र की सरकार हो या यूपी में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही सरकार हो, यहां दलितों-पिछड़ा वर्ग के साथ ही अल्पसंख्यकों के अधिकारों को खत्म किया जा रहा है। इन वर्गों का उत्पीड़न होने पर कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इन वर्गों की लड़ाई लड़ने के लिए सिर्फ और सिर्फ चन्द्रशेखर आजाद के अलावा कोई और नेता मुखर होकर सड़क पर संघर्ष नहीं कर रहा है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) से गठबंधन का मकसद भी वंचितों को न्याय दिलाना है। आज जो देश और यूपी के हालात हैं। उच्च शिक्षा से दलितों व पिछड़ा वर्ग के लोगों को वंचित किया जा रहा है। महंगी शिक्षा का मकसद ही इन वर्गों को शिक्षित होने से रोकना है। यूपी में तो इन वर्ग के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति नहीं मिल रही है। फीस प्रतिपूर्ति बंद होने की वजह से इस वर्ग के छात्र उच्च शिक्षा से लेकर तकनीकी व मेडिकल शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।

यूजीसी रेगुलेशन के लिए बनी समता समिति में दस में से कम से कम पांच सदस्य दलित और पिछड़ा वर्ग के होने चाहिए
उच्च शिक्षा के साथ ही मेडिकल व तकनीकी शिक्षा में दलित व पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के उत्पीड़न को रोकने के लिए लायी गयी यूजीसी की नयी नियमावली पर भी रोक लगा दी गयी है। इस मामले में केन्द्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से पैरवी करनी चाहिए और यूजीसी रेगुलेशन के लिए बनी समता समिति में दस में से कम से कम पांच सदस्य दलित और पिछड़ा वर्ग के होने चाहिए। अभी इस समिति में दलित व पिछड़ा वर्ग के तीन सदस्यों के रखने का प्रावधान है। इसके अलावा एक-एक महिला, विकलांग सदस्य रखने का प्रावधान है, महिला व दिव्यांग के नाम पर समिति में सवर्णों को ही नामित कर लिया जाएगा। ऐसी स्थिति में समता समिति में कम से कम पांच सदस्य दलित व पिछड़ा वर्ग के होने चाहिए। बीपी अशोक का कहना है कि दलितों, पिछड़ों व अल्पसंख्यकों के खिलाफ चन्द्रशेखर आजाद के साथ मिलकर हमारी पार्टी संघर्ष कर रही है। यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में हमारे गठबंधन का असर लोगों को दिखेगा और हम सत्ता में बैलेंसिंग आफ पावर बनकर उभरेंगे।