मायावती का अखिलेश और चंद्रशेखर आजाद पर निशाना
लखनऊ । नीट (NEET) सहित अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों के विरोध में दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे छात्रों के आंदोलन को लेकर बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने कहा है कि इस मुद्दे का पूरी तरह राजनीतिकरण हो गया है। उन्होंने कहा है कि आंदोलन करने वाले केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से शिक्षा व्यवस्था में जरूरी व्यापक सुधार का असली मुद्दा कहीं लुप्त न हो जाए।

दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन को बीएसपी की प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी ने सिर्फ खुला समर्थन ही नहीं दिया है बल्कि इसमें सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव सहित पार्टी के अन्य नेताओं ने सक्रिय रूप से भाग भी लिया है। सपा इस आंदोलन के जरिए यूपी के विधानसभा चुनाव में खास तौर पर युवाओं के बीच अपना जनाधार बढ़ाने की जुगत लगा रही है।
आजाद समाज पार्टी के नेता व सांसद चंद्रशेखर आजाद ने छात्रों पर किए गए बल प्रयोग के विरोध में संसद परिसर में ही धरना दिया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता इस आंदोलन के समर्थन में सड़कों पर उतर चुके हैं। यही कारण है कि मायावती इस आंदोलन का राजनीतिकरण किए जाने का आरोप लगा रही हैं।

विरोध प्रदर्शन को सहानुभूति हासिल
बसपा प्रमुख मायावती ने एक्स पर एक पोस्ट में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और उनकी मांगों को लेकर सवाल उठाए हैं। मायावती ने लिखा है कि, देश में नीट-यूजी सहित विभिन्न परीक्षाओं के पेपर लीक और उसके बाद परीक्षार्थियों की आत्महत्याओं से छात्र-छात्राओं, युवाओं का ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) आंदोलन उभरा।
नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर जारी शांतिपूर्ण धरने को हालांकि लोगों की व्यापक सहानुभूति हासिल है, किंतु सरकारी जवाबदेही के रूप में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद भी शिक्षा व्यवस्था में जरूरी व्यापक सुधार का असली मुद्दा ही कहीं लुप्त ना हो जाए? मायावती ने लिखा है, वैसे इस गर्म मुद्दे को भुनाने के लिए विशेषकर विरोधी पार्टियों में सड़क से लेकर संसद तक में जबर्दस्त होड़ लगी हुई है। इससे भी सरकार और विपक्ष के बीच तनाव व टकराव की परिस्थिति हिंसक होकर किसी न किसी रूप में राज्यों में भी फैल रही है। मायावती ने अपनी पार्टी बीएसपी के लोगों को सचेत व सजग रहने की सलाह दी है।
मानसून सत्र सुचारू रूप से नहीं चल पा रहा
उन्होंने लिखा है कि, इस मुद्दे का पूरी तरह से राजनीतिकरण हो जाने के साथ ही जंतर-मंतर में आंदोलनकारियों के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाईयों ने स्थिति को और अधिक गर्म व गंभीर बना दिया है। इस भारी तनाव और टकरावपूर्ण स्थिति के कारण संसद का वर्तमान मानसून सत्र अभी तक एक दिन भी सुचारू रूप से नहीं चल पाया है, जिससे देश व जनहित के अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही एक प्रकार से रुक सी गई है।