भागवत के बयान के बाद भाजपा में शामिल दलित, पिछड़े, आदिवासी तय करें वह संविधान के साथ या मनुस्मृति के साथ
लखनऊ। दलित, ओबीसी, माइनारिटीज, आदिवासी परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. उदितराज ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर आपत्ति व्यक्त की है। उनका कहना है कि मोहन भागवत ने अपने बयान में कहा है कि ’भारत एक हिंदू राष्ट्र है, इसे संवैधानिक प्रमाण की जरूरत नहीं’ है। जबकि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर हिंदू राष्ट्र को भारतीय लोकतंत्र और समानता के लिए एक बड़ा खतरा मानते थे। डॉ. उदितराज ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है कि संघ प्रमुख भागवत के बयान के बाद भी जो दलित, पिछड़े और आदिवासी भाजपा में हैं वह तय करें कि वे संविधान के साथ हैं या मनुस्मृति के साथ।
भागवत ने कहा, भारत एक हिंदू राष्ट्र है, इसे संवैधानिक प्रमाण की जरूरत नहीं
उन्होंने कहा कि भाजपा की चाकरी कर रहे दलित, पिछड़ा और आदिवासी समाज के नेताओं को इस पर अपना स्पष्ट मत देना होगा, अगर वे मोहन भागवत के इस बयान पर भी चुप रहते हैं तो यह माना जाएगा कि वह डॉ. अंबेडकर के साथ गद्दारी कर रहे हैं। उन्होंने बहुजन समाज के लोगों का आह्वान किया कि समाज के वे लोग जो भाजपा में हैं आपको जहां भी मिलें उनसे सवाल पूछें, जवाब न दें तो इनका बहिष्कार करें और ऐसे लोगों को संविधान विरोधी घोषित किया जाए।
