ठाकुर एमएलए की बैठक के मुकाबले ब्राह्मण एमएलए मिले तो बवंडर क्यों
लखनऊ। कांग्रेस के पूर्व सांसद डॉ. उदितराज ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है कि आखिर क्या है ठाकुर- ब्राह्मण एमएलए की बैठक का सच? उनका कहना है कि जाति की पंचायत तो आम बात है, लेकिन उत्तर प्रदेश में कई जाति आधारित दल भी बने हैं। आरएसएस और बीजेपी के लोग हिंदू राष्ट्र बनाने का नाटक करने वाले जानते हैं वोट के लिए दलित और ओबीसी को ऐसे ही जाल में फंसाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में बीजेपी के ठाकुर एमएलए की बैठक के मुकाबले में ब्राह्मण एमएलए मिले तो बवंडर क्यों मच गया?

हिंदू राष्ट्र बनाने का नाटक करने वाले जानते हैं दलित-ओबीसी को कैसे जाल में फंसाया जा सकता है
क्यों नहीं सच को स्वीकार करके आगे बढ़ा जाये? जीना- मरना, शादी- विवाह, सुख- दुख, वोट का लेना-देना , संकट के समय काम आना आदि जब जाति के अंदर ही होता है तो ब्राह्मण- ठाकुर एमएलए अलग बैठक कर लिए तो कौन सी गलत बात हो गई? दरअसल इससे जाति की सच्चाई सामने आ जाएगी। देश को आगे ले जाना है तो ईमानदारी से जाति को स्वीकार करो और सबको हिस्सेदारी दो वर्ना जातिविहीन समाज बनाओ। भाजपा के ब्राह्मïण विधायकों के अलग से बैठक करने को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने भी सख्त रुख अपनाया है। आखिर ऐसा क्यों, क्या ये विधायक बैठक में भाजपा के साथ बगावत करने की योजना बना रहे थे।
दलित- ओबीसी और आदिवासी क्या सभी निकम्मे और गुणहीन हैं?
डॉ. उदितराज ने एक अन्य ट्वीट में लिखा है कि लखनऊ में अटल प्रेरणा स्थल का लोकार्पण पीएम मोदी ने किया जिसमें डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की मूर्तियां लगीं हैं। मुखर्जी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया था। दीन दयाल जी का क्या विशेष योगदान है जानना मुश्किल नहीं है? इन्हें दलित- पिछड़ों और आदिवासी में से कोई प्रेरणा लायक नहीं मिला। क्या सभी निकम्मे और गुणहीन हैं? आरएसएस और बीजेपी क्या हैं इससे बेहतर समझने का कोई और उदाहरण नही हो सकता।