सपा से आये मनोज पांडेय को महत्वपूर्ण विभाग देकर भाजपा ने एक बार फिर साफ किया पार्टी के लिए अब भी सवर्ण समाज ही सबसे महत्वपूर्ण

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं यूपी के पूर्व राज्यमंत्री सलाहउद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विभागों के बंटवारे ने भाजपा के पीडीए प्रेम की पोल खोल दी है।
सिद्दीकी का कहना है कि साढ़े चार साल बाद योगी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ और उसमें छह नये मंत्री शामिल किये गये। दो मंत्रियों को राज्यमंत्री से स्वतंत्र प्रभार का दर्जा दिया गया।
सरकार ने विस्तार में छह में से पांच मंत्री पीडीए समाज से बनाये। लेकिन विभागों के बंटवारे ने भाजपा की पीडीए विरोधी नीति की पोल खोल दी है।
भाजपा में शुरू से जुड़े दलित, पिछड़ा वर्ग आज भी पार्टी के लिए सिर्फ वोट बैंक
सपा नेता ने कहा कि भाजपा ने पार्टी के कद्दावर नेता और प्रदेश अध्यक्ष रहे भूपेन्द्र चौधरी जो जाट समाज से आते हैं। पिछड़ा वर्ग के होने के कारण इन्हें भी लघु एवं सूक्ष्म उद्यम जैसा महत्वहीन विभाग देकर यह साफ कर दिया है कि भाजपा में केवल और केवल सवर्णों को ही महत्व दिया जाएगा।
इसी विस्तार में सपा से भाजपा में आये मनोज पाण्डेय को खाद्य एवं रसद जैसा महत्वपूर्ण विभाग दिया है। इससे साफ है कि भाजपा के लिए सवर्ण जरूरी है,पार्टी ने अपनी इसी सवर्ण समर्थक मानसिकता के आधार पर ही दूसरे दल से आने वाले सवर्णों को भी महत्वपूर्ण विभाग दिया है। जबकि भाजपा में जीवन बिताने वाले दलित व पिछड़ा वर्ग के मंत्रियों को महत्वहीन विभाग ही दिये गये हैं।

अम्बेडकर का नाम लेने वाली भाजपा दलितों को नहीं देना चाहती उनके अधिकार
सपा नेता ने कहा कि दलितों व पिछड़ा वर्ग का वोट पाने के लिए भाजपा बाबा साहब अम्बेडकर का नाम लेते नहीं थकती है, लेकिन जब इन वर्गो को अधिकार देने की बात आती है तो इन्हें किनारे कर दिया जाता है।
भाजपा की स्पष्ट नीति है उसकी सरकार में केवल और केवल ब्राह्मणों, ठाकुरों और सवर्णों को ही महत्वपूर्ण विभाग, महत्वपूर्ण पदों पर आसीन किया जाएगा।
छोटे से विस्तार और विभाग के बंटवारे से यह बात साफ हो गयी है कि भाजपा पीडीए विरोधी है। यही बात सपा प्रमुख अखिलेश यादव जी लंबे समय से कहते आ रहे हैं, जो अब सही साबित हो रही है।
पीडीए समाज का गठन ही पिछड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यकों को सम्मान देने के लिए हुआ
उन्होंने कहा कि दलितों, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज का हित केवल और केवल सपा में ही सुरक्षित है।
इन वर्गों को सम्मान देने, इनके अधिकार सुरक्षित करने के लिए ही अखिलेश यादव जी ने पीडीए समाज का गठन किया है।
सपा प्रमुख ने चुनाव में टिकट देने और संगठन में जिम्मेदारी देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है। वे पीडीए समाज के अधिकारों की लड़ाई लडऩे के साथ ही संविधान और आरक्षण बचाने की भी लड़ाई लड़ रहे हैं।

2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए खतरे की घंटी
सलाहउद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि भाजपा ने छोटे से मंत्रिमंडल विस्तार में दो दलित, तीन पिछड़ा वर्ग के विधायकों को यह कहकर तरजीह दी कि सपा तो सिर्फ पीडीए-पीडीए चिल्लाती है, लेकिन भाजपा सर्वसमाज में भी दलितों व पिछड़ा वर्ग का विशेष ख्याल रखती है। लेकिन विभागों के बंटवारे के साथ ही भाजपा के पीडीए प्रेम की हकीकत सबके सामने आ गयी।
उन्होंने कहा कि सपा के पीडीए समाज के तहत यूपी ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी दलित, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज अखिलेश यादव जी के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी के साथ मजबूती से जुड़ रहा है, इसको लेकर भाजपा में घबराहट और बेचैनी है।
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को यह बात अच्छी तरह से मालूम है कि जिस तरह से यूपी में मायावती कमजोर हो रहीं हैं और उनका बहुजन समाज सपा की तरफ आकर्षित हो रहा है। राज्य में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में यह भाजपा के लिए खतरे की घंटी है।