सेवानिवृत्त कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति एवं सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन ने किया आवाहन
लखनऊ। केन्द्रीय 8वें वेतन आयोग की विचारणीय विषय में पेंशनरों के पेंशन पुनरीक्षण एवं पेंशनरी लाभ के मुद्दे को शामिल करने, वित्त विधेयक 2025 के माध्यम से सीसीएस (पेंशन) रूल्स में परिवर्तन के द्वारा पेंशनरों में तिथि के आधार पर भेदपरक अंश को हटाने एवं पुराने पेंशनर्स को अंशदायी गैर वित्त पोषित बताने वाले क्लाज के अंश को 8वें वेतन आयोग के गजट नोटीफिकेशन से हटाने की मांग को लेकर 15 दिसम्बर को राष्ट्रव्यापी धरना-प्रदर्शन कर माननीय प्रधानमंत्री जी को ज्ञापन देने का काम करेंगे। लाखों पेंशनर्स जिसका आवाहन अखिल भारतीय राज्य सरकार पेंशनर फेडरेशन ने किया है। उत्तर प्रदेश में 15 दिसम्बर के धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन कार्यक्रम का आवाहन सेवाविृत्त कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति एवं सेवानिवृत्त कर्मचारी पेंशनर्स एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से किया है।

वरिघ्ठ उपाध्यक्ष बीएल कुशवाहा एवं महामंत्री ओपी त्रिपाठी ने बताया कि 15 दिसम्बर को धरना-प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री को ज्ञापन देने का निर्देश समस्त जनपदों को भेज दिया है। जनपदों में बड़े पैमाने पर तैयारी जोरो पर है जिसमें सभी राज्य कर्मी, स्थानीय निकाय, जल संस्थान, विकास प्राधिकरण, सार्वजनिक उपक्रम, आवास विकास सहित विभिन्न विभागों से तथा विभिन्न शिक्षक संवर्गो से सेवानिवृत्त पेंशनर्स को एकजुट करने का अभियान चल रहा है। संगठन के अध्यक्ष अमरनाथ यादव ने कहा कि सेवाकाल का लम्बित वेतन यदि लम्बित न रखा गया होता तो उसे भुगतान करने के लिये सरकार को फण्ड उपलब्ध कराना पड़ता।
15 दिसम्बर को राष्ट्रव्यापी धरना-प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री को सौंपेंगे ज्ञापन
चूँकि उस वेतन को लम्बित रखना था इसलिये फण्ड आवंटित नहीं किया गया, जो उस समय सरकार की भविष्य में भुगतान की जाने वाली बचत रही। इसलिये संदर्भित पेंशन अनफण्डेड कतई नहीं कहा जा सकता है। दूसरे शब्दों में लत्बित वेतन, जो सेवा के दौरान भुगतान नहीं किया गया। वास्तव में वही कर्मचारी का कन्ट्रीव्यूशन हो गया। इस प्रकार यह पेंशन कन्टीब्यूटरी भी है और फण्डेड भी है। इसी कारण सरकार द्वारा जो बजट बनाया जाता है उसमें वेतन और पेंशन को कम्मिटेड एक्पेन्डीचर की श्रेणी में रखा जाता है।यह कोई राजपाट नहीं बल्कि प्रदेश व देश भर के करोड़ों पेंशनर्स एवं उनके परिवारों के जीवन-यापन का सहारा बनी पेंशन व पेंशनरी लाभों को बचाये रखने का सवाल है। इतने पर भी सरकार का नाकारात्मक रवैया नहीं बदला तो आन्दोलन तेज करना बाध्यता होगी।