अदालत ने यह फैसला अतुल कपूर और सुनील कुमार मेहरोत्रा समेत सेवानिवृत्त कर्मचारियों द्वारा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त (RPFC) द्वारा उच्च पेंशन दावों को खारिज करने वाले आदेशों को निरस्त कर दिया है। अदालत के इस फैसले से HAL लखनऊ के करीब 400 पेंशनरों को बढ़ी हुई पेंशन मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
अदालत ने यह फैसला अतुल कपूर और सुनील कुमार मेहरोत्रा समेत सेवानिवृत्त कर्मचारियों द्वारा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। 19 दिसंबर 2025 और 8 मई 2026 को दिए गए फैसलों को उच्च पेंशन की लड़ाई लड़ रहे पेंशनरों के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है।
मामला कर्मचारी पेंशन योजना (EPS)-1995 के तहत वास्तविक वेतन के आधार पर उच्च पेंशन के लिए जमा किए गए ज्वाइंट ऑप्शन फॉर्म को खारिज किए जाने से जुड़ा था। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) का तर्क था कि HAL ट्रस्ट नियमों के अनुसार पेंशन योग्य वेतन की सीमा 6500 रुपये तक ही तय है। वहीं याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कर्मचारी और नियोक्ता दोनों ने वास्तविक वेतन के आधार पर अंशदान जमा किया है, इसलिए पेंशन की गणना भी वास्तविक वेतन के आधार पर होनी चाहिए।
न्यायमूर्ति प्रकाश सिंह ने अपने फैसले में कहा कि EPS-1995 एक लाभकारी वैधानिक योजना है, जो किसी भी आंतरिक ट्रस्ट नियम से ऊपर है। अदालत ने कहा कि कर्मचारियों के हित में किए गए संशोधनों का लाभ केवल इस आधार पर नहीं रोका जा सकता कि ट्रस्ट नियमों में औपचारिक संशोधन नहीं हुआ। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई कट-ऑफ डेट किसी कर्मचारी के वैधानिक अधिकार को समाप्त नहीं कर सकती। फैसले में सुप्रीम कोर्ट के आर.सी. गुप्ता और सुनील कुमार बी. मामलों में दिए गए सिद्धांतों का भी उल्लेख किया गया।

HAL कर्मचारी संघ लखनऊ के पूर्व अध्यक्ष अतुल कपूर ने फैसले को देशभर के पेंशनरों के लिए मील का पत्थर बताया
HAL कर्मचारी संघ लखनऊ के पूर्व अध्यक्ष अतुल कपूर ने फैसले को देशभर के पेंशनरों के लिए मील का पत्थर बताया।उन्होंने कहा, “न्यायपालिका ने साफ कर दिया है कि वैधानिक अधिकारों को किसी प्रशासनिक नियम से दबाया नहीं जा सकता। इस फैसले ने उच्च पेंशन आंदोलन को नई ताकत दी है और हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उम्मीद दी है।”
पेंशनरों की कोर कमेटी के अनुसार, इस फैसले का लाभ HAL लखनऊ के करीब 400 पेंशन दावेदारों को मिलने की उम्मीद है। साथ ही देश के अन्य हिस्सों में लंबित समान मामलों पर भी इसका असर पड़ सकता है। कमेटी ने यह भी आरोप लगाया कि एक मामले में डिवीजन बेंच में अपील दाखिल की गई, लेकिन करीब 175 समान मामलों में न तो अपील की गई और न ही कोई रिकवरी नोटिस जारी किया गया, जो न्यायिक निर्देशों के पालन न होने की ओर संकेत करता है।
पेंशनरों की ओर से अधिवक्ता प्रदीप कुमार सिंह वत्स और अंशुमान सिंह राठौर ने अदालत में पक्ष रखा। नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ पेंशनर्स एसोसिएशन (NCPA) ने भी फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि देश के विभिन्न हाईकोर्टों से उच्च पेंशन के पक्ष में आए फैसलों ने पेंशनरों की कानूनी स्थिति को और मजबूत किया है।