भीषण तपिश के कारण हीट स्ट्रोक होने का गंभीर खतरा बढ़ा : राजीव कनौजिया

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​चिकित्सा एवं जन-स्वास्थ्य परामर्श : भीषण गर्मी, लू  (Heat Wave) और ‘हीट स्ट्रोक’ से बचाव की विस्तृत गाइड लाइन 

​लखनऊ । लखनऊ सहित पूरे उत्तर प्रदेश में सूर्य का प्रकोप इस समय चरम पर है और दैनिक तापमान 44{C} या उससे अधिक तक पहुँच रहा है। इस भीषण तपिश और गर्म हवाओं (लू) के कारण शरीर का तापमान अनियंत्रित होने और हीट स्ट्रोक (Heat Stroke) होने का गंभीर खतरा बना हुआ है। प्रांतीय प्रवक्ता, डीपीआरए  ​व मुख्य फार्मासिस्ट, बलरामपुर चिकित्सालय, लखनऊ, राजीव कुमार कनौजिया ने बताया कि ​एक मुख्य फार्मासिस्ट और चिकित्सा जगत से जुड़े होने के नाते, मेरा यह परम कर्तव्य है कि इस आपातकालीन मौसम में आप सभी तक सही और वैज्ञानिक स्वास्थ्य जानकारियां पहुँचें। कृपया इन सावधानियों को स्वयं भी अपनाएं और अपने परिवार व करीबियों को भी सुरक्षित रखें।

​1. हीट स्ट्रोक (लू लगना) क्या है और यह क्यों खतरनाक है?

​चिकित्सीय भाषा में, जब हमारा शरीर अत्यधिक बाहरी गर्मी के कारण अपने आंतरिक तापमान को नियंत्रित नहीं कर पाता (सामान्यतः तापमान 37{C} या 98.6{F} से बढ़कर 104{F} या उससे ऊपर चला जाता है) और थर्मोरेगुलेटरी सिस्टम (पसीना आने की प्रक्रिया) फेल हो जाता है, तो उसे हीट स्ट्रोक कहते हैं। यह एक गंभीर ‘मेडिकल इमरजेंसी’ है, जिसमें क्षण भर की लापरवाही भी घातक हो सकती है।

​2. मुख्य लक्षण (इन्हें तुरंत पहचानें)

​अचानक बहुत तेज बुखार आना (शरीर का भट्टी की तरह तपना)।
​त्वचा का लाल, गर्म और बिल्कुल सूखा हो जाना (पसीना आना पूरी तरह बंद हो जाना)।
​तेज सिरदर्द, चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा छाना या बेहोशी।
​जी मिचलाना, लगातार उल्टी होना या अत्यधिक शारीरिक कमजोरी।
​नाड़ी (Pulse Rate) और सांस की गति का अत्यंत तीव्र हो जाना।

3. मुख्य फार्मासिस्ट द्वारा अनुशंसित विस्तृत उपाय और सावधानियां

​क) रिहाइड्रेशन एवं इलेक्ट्रोलाइट संतुलन (शरीर में पानी की कमी न होने दें), ​निरंतर जल सेवन: प्यास लगने का इंतजार बिल्कुल न करें। हर 20-30 मिनट में थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें ताकि शरीर का आंतरिक तापमान स्थिर रहे।
​फार्मास्यूटिकल एवं पारंपरिक इलेक्ट्रोलाइट्स : सादे पानी के अलावा ओआरएस (ORS – Oral Rehydration Salts) का घोल सबसे सुरक्षित और प्रामाणिक उपाय है। इसके अतिरिक्त घर में बना ताज़ा नींबू पानी (नमक-चीनी के साथ), पुदीने का शर्बत, कच्चे आम का पना, जौ का सत्तू, मट्ठा, छाछ और नारियल पानी का सेवन नियमित रूप से करें। ये शरीर में सोडियम और पोटेशियम जैसे आवश्यक मिनरल्स को कम नहीं होने देते।​रसीले फल और सब्जियां: भोजन में तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, संतरा और टमाटर जैसी पानी से भरपूर चीजों को शामिल करें।
​इनसे कड़ाई से बचें: बासी भोजन, अधिक मसालेदार, गरिष्ठ और तला-भुना खाना खाने से बचें। चाय, कॉफी, अत्यधिक चीनी वाले कोल्ड ड्रिंक्स और अल्कोहल का सेवन कतई न करें, क्योंकि ये ‘डाईयूरेटिक’ का काम करते हैं और शरीर को और ज्यादा डिहाइड्रेट (पानी की कमी) करते हैं।

​ख) दैनिक दिनचर्या और पहनावा

​पीक ऑवर्स में प्रतिबंध: दोपहर 12:00 बजे से शाम 4:00 बजे के बीच, जब अल्ट्रावॉयलेट किरणें और गर्मी सबसे तीखी होती है, तब बहुत जरूरी न होने पर घर या कार्यस्थल से बाहर न निकलें।
​वस्त्रों का चयन: हमेशा हल्के रंग के, ढीले और सूती (कॉटन) कपड़े ही पहनें। सिंथेटिक या गहरे रंग के कपड़े गर्मी को सोखते हैं और शरीर के तापमान को बढ़ाते हैं।
​धूप से सुरक्षा: यदि बाहर जाना ही पड़े, तो सिर और चेहरे को सफेद सूती कपड़े या अंगोछे से अच्छी तरह ढंकें। धूप का चश्मा (सनग्लासेस), छाता और पैरों में आरामदायक जूते-चप्पल का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें।
​ग) यात्रा और वाहनों के संबंध में विशेष चेतावनी
​बंद गाड़ी में खतरा: धूप में खड़ी कार या किसी भी बंद वाहन के भीतर बच्चों, बुजुर्गों या पालतू जानवरों को भूलकर भी अकेला न छोड़ें। कुछ ही मिनटों में बंद गाड़ी के अंदर का तापमान 50{C} से ऊपर जा सकता है, जो दम घुटने और हीट स्ट्रोक का तत्काल कारण बनता है।

​4. आपातकालीन स्थिति में प्राथमिक उपचार (First Aid)

​यदि आपके आसपास किसी व्यक्ति को लू लगने या बेहोश होने के लक्षण दिखें, तो बिना पैनिक हुए तुरंत ये कदम उठाएं:
​शीतल स्थान पर लाएं: पीड़ित व्यक्ति को तुरंत धूप से हटाकर किसी ठंडे, हवादार या एयर-कंडीशंड कमरे/छाया में ले जाएं।
​वस्त्र ढीले करें: उनके शरीर पर मौजूद तंग कपड़ों को तुरंत ढीला करें।
​एक्सटर्नल कूलिंग (शरीर ठंडा करना): ठंडे पानी की पट्टियां सिर, गर्दन, बगल (Armpits) और जांघों के जोड़ों पर रखें, क्योंकि यहाँ मुख्य रक्त धमनियां होती हैं जिन्हें ठंडा करना जरूरी है। संभव हो तो पूरे शरीर को गीली चादर से लपेट दें।
​हवा करें: उन्हें लगातार पंखे या कूलर की सीधी हवा में रखें।
​होश में होने पर ही हाइड्रेट करें: यदि व्यक्ति पूरी तरह होश में हो और निगलने की स्थिति में हो, तभी उसे धीरे-धीरे ठंडा पानी या ओआरएस दें। बेहोशी की हालत में मुंह में कुछ भी न डालें।
​त्वरित चिकित्सा: बिना समय गंवाए नजदीकी सरकारी अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) या डॉक्टर से संपर्क करें।
​एक मानवीय और संवेदनशील अपील:
इस भीषण तपिश में बेजुबान पशु-पक्षियों का भी विशेष ध्यान रखें। अपनी छतों, बालकनी और घरों के बाहर मिट्टी के बर्तनों में साफ पानी और दाना जरूर रखें। रास्ते में दिखने वाले लावारिस पशुओं के लिए भी छाया और पानी का प्रबंध करने का प्रयास करें।
​सजगता और सही जानकारी ही इस मौसम में हमारा सबसे बड़ा कवच है। स्वयं सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें और अपनों को जागरूक करें।

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