केन्द्र सरकार विभिन्न विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर लेटरल एंट्री के जरिए लोगों को नियुक्त कर रही

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं यूपी के पूर्व राज्यमंत्री सलाहउद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों और उनके द्वारा संविधान में प्रदत्त किये गये आरक्षण की व्यवस्था को खत्म करने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब सरकार बनने पर भाजपा ने दलितों व पिछड़ा वर्ग के अधिकारों को खत्म करने की साजिश न की हो। 2014 से केन्द्र और 2017 से यूपी की सत्ता में काबिज भाजपा ने दलितों और पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को खत्म करने के लिए सरकारी विभागों में नियमित नियुक्तियां ही बंद कर दीं, अब सरकार आउटसोर्सिंग पर विभिन्न विभागों में लोगों को नौकरियों पर रख रही है।
आउटसोर्सिंग के जरिए नौकरियों में आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। इसी तरह केन्द्र सरकार विभिन्न विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर लेटरल एंट्री के जरिए लोगों को नियुक्त कर रही है। लेटरल एंट्री के जरिए नौकरियों में भी आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। इन मुद्दों पर दलित संगठनों ने आवाज उठायी, उन्हें राज्य और केन्द्र की भाजपा सरकार से सिर्फ आश्वासन मिला।

यूपी में भाजपा का विजय रथ रोककर इसे केन्द्र की सत्ता में आने से रोके शोषित-वंचित समाज
सलाहउद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि भाजपा देश में आजादी से पहले की गैरबराबरी के आधार पर स्थापित सामाजिक व्यवस्था को फिर से लागू करना चाहती है। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेतृत्व ने नारा दिया चार सौ सीटें पाने पर वह देश का संविधान बदल देगी। आरएसएस ने तो संविधान की स्थापना के समय ही इसका विरोध किया था और कहा था कि जब देश में मनुस्मृति के तहत कानून है तो संविधान की क्या जरूरत। उस समय आरएसएस कमजोर था तो संविधान के निर्माण का विरोध नहीं कर सका, लेकिन अब उसकी अपनी विचारधारा को मानने वाली उसकी अपनी पार्टी भाजपा की केन्द्र में सरकार है। उनका कहना है कि अम्बेडकर जयंती के मौके पर जिस तरह से भाजपा ने कार्यक्रम आयोजित किये, उससे यह साफ हो गया है कि भाजपा नेतृत्व डॉ. अम्बेडकर को तो मानता है, लेकिन उनके विचारों को कतई नहीं मानता और वह बाबा साहब के विचारों को खत्म करने के लिए अभियान चला रहा है।
उन्होंने कहा कि लोकसभा में दो- तिहाई बहुमत पाते ही भाजपा की पहली प्राथमिकता भारतीय संविधान को बदलना होगी। ऐसे में शोषितों, वंचितों, दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की जिम्मेदारी बनती है कि यूपी में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा के चुनाव में इन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएं क्योंकि केन्द्र की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर ही जाता है। यूपी में इनके विजय रथ को रोक दिया गया तो केन्द्र में आने का इनका ख्वाब सिर्फ ख्वाब ही रह जाएगा।