बाबा साहब के स्मारक तो बनवा रही, लेकिन उनकी विचारधारा को लागू नहीं करना चाहती भाजपा
कमल जयंत
लखनऊ। सामाजिक संस्था बहुजन भारत के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस कुंवर फतेह बहादुर का कहना है कि किसी भी महापुरुष के सम्मान में स्मारक बनाना स्वागतयोग्य कदम है। भाजपा सरकार बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के नाम से लखनऊ में भव्य स्मारक बनवा रही है और बाबा साहब की सभी मूर्तियों पर छतरी लगवा रही है।

सरकार के इस फैसले पर किसी को कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन किसी सियासी दल द्वारा अचानक बाबा साहब को सम्मान देने के फैसले पर यह सवाल उठना लाजिमी है कि यूपी में भाजपा की नौ साल से सरकार है अबतक इस सरकार ने बाबा साहब के सम्मान में इस तरह के फैसले क्यों नहीं लिये।
कुंवर फतेह बहादुर ने कहा कि मेरा मानना है कि यदि कोई संस्था या सियासी दल किसी महापुरुष का सम्मान करना चाहती है तो पहले वह यह बताये कि क्या वह बाबा साहब की विचारधारा से सहमत है या नहीं। जैसा कि सर्वविदित है कि डॉ. अम्बेडकर ने वंचितों, दलितों, पिछड़ों के मान-सम्मान एवं समाज में उनके अधिकार के लिए हमेशा संघर्ष किया, जिसकी अंतिम परिणित भारतीय संविधान के रूप में हुई। यह माना जाता है कि संविधान निर्माण में बाबा साहब का सबसे अधिक योगदान रहा, इसीलिए उन्हें संविधान निर्माता के रूप में जाना जाता है। संविधान में दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक समाज और महिलाओं को मान-सम्मान व अधिकार देने के लिए व्यवस्थाएं की गईं हैं।
संविधान निर्माण के समय देश में एक वर्ग ऐसा भी था जो संविधान का विरोध कर रहा था
उनका कहना है कि भारतीय संविधान के मुताबिक देश में सभी को समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व व बराबरी का अधिकार दिया गया है, यहां यह महत्वपूर्ण है कि संविधान निर्माण के समय एक वर्ग ऐसा भी था जो संविधान का विरोध कर रहा था।भारतीय संविधान के अनुसार जाति धर्म नस्ल के आधार पर इसी प्रकार के भेदभाव को समाप्त किया गया है। जिस विचारधारा के लोग संविधान की जगह मनुस्मृति को लागू करने की बात कह रहे थे वर्तमान में मुख्य रूप से इसी विचारधारा को मानने वाले राजनितिक दल की उत्तर प्रदेश और केंद्र में सरकार स्थापित है।
वर्ष २०२४ में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के नेता यह कह रहे थे कि यदि चार सौ सीटें मिल गयीं तो वे संविधान बदल देंगे इससे यह स्पष्ट है कि भाजपा के लोग मूलत: संविधान की विचारधारा से सहमत नहीं हैं।
संस्था के अध्यक्ष ने कहा कि इस स्थिति में यह देखना होगा कि क्या बाबा साहब का स्मारक बनाने या बाबा साहब की मूर्तियों पर छतरी लगाने की बात करने वाली भाजपा क्या बाबा साहब की विचारधारा को स्वीकार करेगी?
बहुजन समाज के लोग संविधान के प्रति प्रतिबद्ध
उनका कहना है कि दलित समाज देख रहा है कि भाजपा केवल प्रतीकों की राजनीति महज उनका वोट पाने के लिए कर रही है, वह यह भी जानना चाह रहा है कि क्या भाजपा बाबा साहब की विचारधारा से सहमत है, अगर हां तो संविधान विरोधी और मनुवादी व्यवस्था का समर्थन कर रहे लोगों की आलोचना क्यों नहीं कर रही। इससे यह साफ है कि भाजपा केवल वोट की खातिर बाबा साहब के स्मारक का निर्माण और उनकी मूर्तियों पर छतरी का निर्माण करा रही है। दलितों, पिछड़ों को भाजपा की इस मानसिकता से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ये वही लोग हैं जो आजादी के समय से ही बाबा साहब की विचारधारा का विरोध करते रहे हैं। अब देखना यह है कि भाजपा द्वारा बाबा साहब की मूर्तियों पर छतरी लगवाने व स्मारक बनवाने से बाबा साहब की विचारधारा को मानने वाले लोग भाजपा के साथ खड़े होंगे या उसका विरोध करेंगे। दलितों, पिछड़ों,बाबा साहब को मानने वाले लोग केवल प्रतीकों की राजनीति से सहमत नहीं होंगे बल्कि जो राजनीतिक दल बाबा साहब की विचारधारा एवं संविधान के अनुसार दलितों, पिछड़ों, अलसंख्यकों, गरीबों एवं वंचितों के अधिकारों की रक्षा एवं विकास के लिए प्रतिबद्ध होंगे वे उनके साथ रहेंगे।