निशीकांत जी क्या आपके पूर्वजों ने भारत में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए थे
लखनऊ। दलित, ओबीसी, माइनारिटीज, आदिवासी परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. उदितराज ने कहा कि सोनिया गांधी जी जहाँ और जिससे भी इलाज़ कराएं, यह पूरी तरह उनका व्यक्तिगत निर्णय है। इसमें भी बहुजनों को नीचा दिखाने का अवसर ढूंढ लेना आपकी जहरीली सोच को दर्शाता है।

उदितराज भाजपा सांसद निशीकांत दुबे द्वारा सोनिया गांधी के इलाज के संबंध में किये गये ट्वीट का जवाब दे रहे थे। दुबे ने ट्वीट में लिखा है कि राहुल गांधी को सोनिया गांधी का इलाज एक निजी अस्पताल में करा रहे हैं। उन्हें सरकारी अस्पताल में जहां साठ फीसदी दलित- पिछड़ा वर्ग के डाक्टर हैं, वहां इलाज कराना चाहिए।उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस के लोगों को दलित और ओबीसी समाज को नीचा, अयोग्य और निकम्मा दिखाने का मौका चाहिए। आरोप लगाया जा रहा है कि सोनिया गांधी जी का इलाज एम्स में न होकर गंगा राम हॉस्पिटल में इसलिए हुआ क्योंकि वहां आरक्षित वर्ग के डॉक्टर नहीं हैं। यह भी कहा जा रहा है कि एम्स में 60′ डॉक्टर आरक्षित वर्ग से हैं, इसलिए वे अयोग्य हैं जो पूरी तरह गलत और भेदभावपूर्ण सोच है। एम्स आज भी देश का नंबर वन अस्पताल है लेकिन कौन कहां इलाज कराए यह उसकी सुविधा और इच्छा पर निर्भर करता है।
लाखों आविष्कारों में सवर्णों का कौन-सा योगदान है, सिवाय भेदभाव, ठगी और झूठ के?
उदितराज ने निशीकांत से पूछा कि क्या आपके पूर्वजों ने भारत में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए थे? अंग्रेज़ों ने आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था विकसित की और आपने भी उन्हीं से सीखा। आप खुद को मेरिटधारी बताते हैं तो यह भी बताइए कि लाखों आविष्कारों में आपका कौन-सा योगदान है, सिवाय भेदभाव, ठगी और झूठ के? क्या आपने कोई वैक्सीन, टैबलेट, एंटी बायोटिक, कैप्सूल, सर्जिकल उपकरण, ऑपरेशन थिएटर, एक्स-रे, एमआरआई, ईसीजी, टीएमटी, एनेस्थीसिया, वेंटिलेटर, ड्रिप या इस तरह के हज़ारों उपकरणों में से कोई एक बनाया है? अगर आप इतने बड़े मेरिट वाले हैं तो ख़ुद के बेटा को लंदन पढऩे के लिए क्यों भेजा? आपके पूर्वजों ने न तो स्वयं ज्ञान अर्जित किया और न ही बहुजनों को करने दिया। पाखंड, झूठ और अंधविश्वास के कारण देश गुलाम हुआ और बहुजन शिक्षा से वंचित रहे। उन्होंने कहा कि आज भी शिक्षा और अनुसंधान में आपका वर्चस्व है, लेकिन फिर भी कोई मौलिक आविष्कार सामने नहीं आया। जब तक जातिवाद रहेगा, तब तक वास्तविक प्रगति संभव नहीं है।
