अफहाम-ए-जमा सोसाइटी ने केन्द्र सरकार से की इस कानून में बदलाव की मांग
कमल जयंत
लखनऊ। अफहाम-ए-जमा सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद अली मीसम नकवी (एडवोकेट) ने कहा कि शिया मुसलमानों में तीन तलाक का कोई प्राविधान नहीं है। बावजूद इसके शियाओं के खिलाफ भी तीन तलाक के मुकदमें लिखाये जा रहे हैं। उनका कहना है कि देश की मौजूदा सरकार ने संसद में तीन तलाक का बिल पास कराके इसे कानून बना दिया।

सुन्नी समुदाय में है तीन तलाक का प्रावधान
मीसम नकवी ने कहा कि अब महिलाओं के उत्पीडऩ को रोकने के लिए इस कानून से शिया समुदाय का भारी नुकसान हो रहा है। शिया समुदाय की महिलाएं भी तीन तलाक के प्राविधान के तहत मुकदमें दर्ज करा रहीं हैं। जबकि इस मामले में हमारे समुदाय में अलग प्रावधान है। हमारे यहां निकाह का भी अलग प्रावधान है। जबकि सुन्नी समुदाय में तीन तलाक का प्रावधान है। सरकार ने बिना जानकारी किये, इस एक्ट को पूरे मुस्लिम समुदाय के लिए लागू कर दिया। जबकि सरकार को शिया समुदाय के बड़े आलिमों, मौलानाओं से भी इस मामले में विचार-विमर्श करना चाहिए था, जो सरकार ने नहीं किया।
उनका कहना है कि इस मामले में शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष से मिलकर भी अपना पक्ष रख चुके हैं। बोर्ड भी उनकी बात से सहमत है। मीसम नकवी का कहना है कि शिया समुदाय से तीन तलाक के प्रावधान को खत्म कराने तक उनका ये अभियान लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा। नकवी ने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष के साथ ही शिया समुदाय के कई मौलानाओं से भी बातचीत हुई है। उनका कहना है अगर केंद्र सरकार ने जल्द ही तीन तलाक कानून से शिया समुदाय को अलग नहीं किया तो इस मुद्दे पर उनका संगठन देश व्यापी आंदोलन शुरू करेगा।

हमारी सोसाइटी ने टूटने से बचाये नौ सौ परिवार
मीसम का कहना है कि उनकी संस्था पति-पत्नी के बीच मनमुटाव या विवाद को खत्म करके तलाक होने और परिवार को टूटने से बचाने के लिए काम कर रही है। यहां तक तमाम बार फैमिली कोर्ट में पति-पत्नी के जो विवाद नहीं सुलझ पाते हैं। उन्हें भी हमारी संस्था को भेजा है। हमारी संस्था निशुल्क मामलों का निपटारा कराती है और टूट रहे परिवार को जोड़ती है। इसके लिए संस्था पूरे देश में सक्रिय रूप से काम कर रही है। बुलावे पर दूसरे राज्यों में जाकर भी हम पति-पत्नी के बीच सुलह-समझौता कराने की कोशिश करते हैं। लगभग नब्बे फीसदी मामले बातचीत से हल हो जाते हैं और उनका परिवार टूटने से बच जाता है। उनका कहना है कि अफहाम-ए-जमा सोसाइटी अपने इस अभियान में लगी हुई है और प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों से भी सुलह-समझौते के लिए दम्पति उनकी संस्था से संपर्क करते हैं और हमारी संस्था जरूरत पड़ने पर दूसरे राज्यों में जाकर भी पति-पत्नी के बीच समझौता कराके परिवार उजड़ने और तलाक की नौबत से बचाते हैं।