कांशीराम जी को चिंता थी कि वह शोषितों को हुक्मरान बना पाएंगे या नहीं : नसीमुद्दीन सिद्दीकी

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बहुजन नायक ने अपने जीवनकाल में वंचित समाज को हुक्मरान बनाने के सपने को साकार किया

कमल जयंत

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठï नेता एवं यूपी के पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने बिखरते बहुजन आंदोलन को सपा के पीडीए के जरिए मजबूत करने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि देश के सबसे कमजोर और उत्पीडऩ वर्ग को हुक्मरान बनाने का सपना बसपा के संस्थापक अध्यक्ष कांशीराम जी ने देखा था और वे इसे पूरा करने के लिए रात को भी जागते थे।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने बताया कि कांशीराम जी 1991 में इटावा से लोकसभा का उपचुनाव जीते और दिसंबर की ठंड में सहारनपुर से साइकिल यात्रा शुरू की, उस समय बांदा से बसपा का विधायक था और कांशीराम जी की साइकिल यात्रा में शामिल हुआ।

उन्होंने बताया कि जब साइकिल यात्रा फतेहपुर पहुंची तो रात में पीडब्ल्यूडी के गेस्ट हाउस में कांशीराम जी रुके और उनके बगल के कमरे में मैं रुका था। उनका कमरा मेरे कमरे से लगा था, रात में ढाई बजे कांशीराम जी के खांसने की आवाज आई, मैं उठ गया और हिम्मत करके उनके कमरे में दस्तक दी, उन्होंने मुझे कमरे में बुला लिया। वह कमरे में टहल रहे थे। मुझसे जब नहीं रहा गया तो मैंने पूछा साहब आपकी तबियत खराब है क्या। उन्होंने कहा हां मेरी तबियत खराब है। तब मैंने उनसे कहा कि मैं दवा ले आता हूं, यहां सभी जानने वाले हैं, मैं उनसे दवा ले आऊंगा, अब दवा का नाम बताइये।

कांशीराम जी ने कहा आपको हमारी बीमारी के बारे में जानकारी है, आपने मुझसे मेरे मर्ज के बारे में तो पूछा ही नहीं

इस पर कांशीराम जी ने कहा कि आपको हमारी बीमारी के बारे में जानकारी है, आपने मुझसे मेरी बीमारी के बारे में तो पूछा ही नहीं तो किस मर्ज की दवा ले आओगे। उन्होंने कहा कि आप यहां बैठो, और मेरा मर्ज समझ लो। तब तो दवा ला पाओगे।

उन्होंने बताया कि वह रात में दस बजे सो जाते हैं और रात में डेढ़ बजे उनकी नींद खुल जाती है। फिर मैं नहीं सोता हूं क्योंकि मुझे सदियों से सताये गये दलित-शोषित और वंचित समाज को इस देश का हुक्मरान बनाना है। बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने संविधान में एक वोट का अधिकार दिलाकर इस समाज को हुक्मरान बनाने की नीव रख दी, लेकिन वह अपने जीते-जी वंचित समाज को हुक्मरान नहीं बना पाये। अब पता नहीं मैं भी इस वर्ग को अपने जीते जी देश का हुक्मरान बना पाऊंगा या ये सपना लिये ही मर जाऊंगा।

आज हम कांशीराम जी द्वारा दिखाये गए रास्ते पर चलने के बजाय उलटी दिशा में जा रहे हैं

कांशीराम जी ने रात में जागकर जो सपना देखा उसे अपने जीते जी पूरा कर दिया। उन्होंने देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में अपने जीवित रहते एक बार नहीं बल्कि चार बार बहुजनों की सरकार बनायी। आज हम कांशीराम जी दिखाये गये रास्ते पर चलने के बजाय उलटी दिशा में जा रहे हैं। बहुजन आंदोलन को दिशा देने का जिनकी जिम्मेदारी है, उन्होंने इस आंदोलन को खत्म करना शुरू कर दिया है। ï

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