पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
लखनऊ। उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग ने वर्ष 2025 के लिए यूपी अधीनस्थ सेवा (पीसीएस) और अन्य वन (एसीएफ) के इम्तिहान के प्री एग्जाम में पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों जिनका कटआफ सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों से ज्यादा है, इसके बावजूद पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को मेन्स परीक्षा के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। अयोग्य घोषित अभ्यर्थियों मनीष कुमार एवं अन्य ने उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में एक याचिका दायर की। अभ्यर्थियों ने कोर्ट में माइग्रेशन रूल्स और आरक्षण अधिनियम के यूपी लोकसेवा आयोग द्वारा पालन न किये जाने को आधार बनाया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता कृष्ण कन्हैया पाल की बहस को सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने यूपी लोकसेवा आयोग को तीन सप्ताह में प्रति शपथपत्र दायर करने का आदेश दिया और अगली सुनवाई की तिथि 22 जनवरी 2026 तय की है।

अधिवक्ता कृष्ण कन्हैया पाल की बहस सुनने के बाद आयोग को तीन सप्ताह में प्रति शपथपत्र दायर करने का दिया आदेश
उल्लेखनीय है कि यूपी लोकसेवा आयोग द्वारा सहायक समीक्षा अधिकारी और समीक्षा अधिकारी की परीक्षा में सामान्य वर्ग से अधिक अंक लाकर पास होने वाले पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को प्री परीक्षा में ही फेल कर दिया गया था। इसके विरोध में विवेक यादव ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में एक याचिका दायर की। विवेक यादव के वकील कृष्ण कन्हैया पाल ने अदालत में पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों का पक्ष रखते हुए कहा कि जब सहायक समीक्षा अधिकारी और समीक्षा अधिकारी के पद पर पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों ने सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों से अधिक अंक हासिल किये हैं तो उन्हें किस आधार पर प्री परीक्षा में फेल कर दिया गया। जबकि कानून भी यह कहता है कि यदि दलित या पिछड़ा वर्ग का कोई भी अभ्यर्थी किसी नौकरी की परीक्षा में सामान्य वर्ग की श्रेणी के लिए तय अंक ले आता है तो उसका चयन सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों की श्रेणी में किया जाता है। यह मामला भी हाईकोर्ट में लंबित है।