महासभा प्रांगण से डॉ. अंबेडकर के अस्थि कलश को विस्थापित नहीं होने देंगे : केके गौतम

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संविधान के अनुच्छेद 49 के अनुसार इन आस्था एवं राष्ट्रीय महत्व के प्रतिकों का संरक्षण करने का बाध्यकारी दायित्व राज्य सरकार को : राम कुमार गौतम

 लखनऊ। आनंद बुद्ध विहार औरंगाबाद खालसा लखनऊ में बुद्ध- अंबेडकर समितियों,संगठनों एवं सामाजिक संगठनों के अध्यक्ष व सचिवों की एक आवश्यक बैठक आयोजित हुई।।,बैठक में लखनऊ में 10 विधानसभा मार्ग स्थित अंबेडकर महासभा के प्रांगण में स्थापित बाबा साहब के अस्थि कलश, बुद्ध प्रतिमा, बोधिवृक्ष, अशोक स्तंभ आदि को जुलाई 2026 में वहां से हटाकर ऐशबाग में विस्थापित किए जाने के संबंध में एमएलसी द्वारा दिए गये बयान पर भयंकर आक्रोश व्यक्त किया।

बैठक में सर्वसम्मत से निर्णय लिया गया कि समस्त बुद्ध-अंबेडकर समितियों संगठनों एवं सामाजिक संगठनो के अध्यक्ष एवं सचिवों के द्वारा अपने-अपने स्तर से राष्ट्रपति,  प्रधानमंत्री, गृहमंत्री,  यूपी की राज्यपाल व मुख्यमंत्री को प्रत्यावेदन / ज्ञापन भेज कर उपरोक्त स्थल से राष्ट्रीय व ऐतिहासिक धरोहर वह आस्था  के प्रतीको को न हटाए जाने तथा इसी स्थल पर उनके सौंदर्यीकरण करने तथा भव्य स्मारक बनाए जाने के लिए अनुरोध किया जाए।

बैठक में पूर्व कैबिनेट मंत्री के के गौतम ने कहा कि यदि इन राष्ट्रीय धरोहरों एवं आस्था के प्रति से छेड़छाड़ की जाती है तो देश-विदेश के करोड़ों अंबेडकर व बुद्ध अनुयायी आक्रोशित होकर आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बहुजन समाज के देश के समस्त सांसदों, उत्तर प्रदेश के विधायकों तथा राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को भी ज्ञापन भेज कर अंबेडकर महासभा को ना हटाए जाने हेतु प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को लिखने हेतु अनुरोध किया जाए। प्रत्येक रविवार सायं  6:00 बजे से अंबेडकर महासभा स्थित भगवान बुद्ध की प्रतिमा व बाबा साहब केअस्थि कलश पर बुद्ध वंदना  पूजा अर्चना आयोजित की जाए।

पूर्व कैबिनेट वित्त मंत्री एवं संयोजक डॉ. अम्बेडकर अस्थि कलश बचाओ मोर्चा” कमला कांत गौतम के द्वारा की गई। बैठक में पूर्व एसडीएम लखनऊ  बहुजन समाज वृंदावन ग्रुप के संयोजक रामकुमार गौतम ने बताया कि अंबेडकर महासभा स्थल पर बाबा साहब के अस्त कलश की स्थापना उनकी पत्नी डॉक्टर सविता अंबेडकर के द्वारा राजकीय सम्मान के साथ 14 अप्रैल 1991 को की गई थी।

रामकुमार गौतम ने बताया कि 21 अप्रैल 1993 को तत्कालीन उपराष्ट्रपति श्री के आर नारायणन जी द्वारा बोधि वृक्ष की स्थापना की गई थी। 6 दिसंबर 2001 को राजनाथ सिंह द्वारा 101 फीट ऊंची बुद्ध प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की गई थी तथा 14 सितंबर 2017 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के द्वारा धाम चक्र की स्थापना की गई थी। इस प्रकार यह स्थल देश-विदेश के करोड़ों बुद्ध व अंबेडकर अनुयायियों की आस्था एवं पूजा स्थल का प्रतीक है।

संविधान के अनुच्छेद 49 के अनुसार आस्था एवं पूजा के ऐसे स्थलोंव प्रतिकों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार का  उत्तरदायित्व है जो स्वेच्छा  नहीं बल्कि उसके लिए बाधिकारी है।

आस्था के इन प्रतीकों को इस सार्वजनिक स्थल से हटाकर किसी किसी  के व्यक्तिगत नाम व व्यक्तिगत पते पर रजिस्टर्ड ट्रस्ट भवन में किसी भी दशा में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है।

बैठक में राम लगन सिंह यादव, केपी भारती, वीर बहादुर बौद्ध, नेकराम बौद्ध, गौतम जयंत, अरुण कुमार गौतम, डॉक्टर आनंद स्वरूप, पीसी कुरील ,आसिफ जमाल खान ,सी पी सिंह अधिवक्ता उच्च न्यायालय, सत्य प्रकाश बौद् नेकराम भारती,राम , डॉक्टर दृष्टि जायसवार, सुनील कुमार गौतम डॉ देवेंद्र प्रताप याद, समय सिंह बौद्ध आदि ने अपने विचार रखें।

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