यह केवल एक छात्र की मौत नहीं, यह उस व्यवस्था के सामने खड़ा सवाल है, जो नियमों की आड़ में मनुष्य की गरिमा को भूल जाती है : गौतम राणे सागर

लखनऊ। संविधान संरक्षण मंच के राष्ट्रीय संयोजक गौतम राणे सागर का कहना है, साहिल वाकोडे अब इस दुनिया में नहीं है। लेकिन उसकी मौत के बाद उठे सवाल जिंदा हैं। और इन सवालों को किसी मोबाइल फोन, ChatGPT या परीक्षा-अनुशासन की एक पंक्ति में दफन नहीं किया जा सकता।
आईआईटी बॉम्बे ने कहा कि परीक्षा के दौरान साहिल के पास मोबाइल था और उसने प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड कर उत्तर प्राप्त करने का प्रयास किया। दूसरी ओर, साहिल के परिवार ने जातिगत उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार की शिकायत पर प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला सहित अन्य के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने और SC/ST अत्याचार निवारण कानून के तहत FIR दर्ज हुई है। मामला अब जांच के अधीन है।
गौतम राणे सागर का कहना है कि यहीं से असली सवाल शुरू होता है। मोबाइल परीक्षा-कक्ष तक पहुँचा कैसे? जिस मोबाइल को लेकर आज पूरी कहानी साहिल के ऊपर केंद्रित की जा रही है, उसी मोबाइल को लेकर पहला सवाल IIT Bombay से होना चाहिए। जब मोबाइल परीक्षा में प्रतिबंधित था, तो वह परीक्षा-कक्ष तक पहुँचा कैसे? प्रवेश व्यवस्था क्या थी? तलाशी हुई या नहीं? मोबाइल जमा कराने की व्यवस्था क्या थी? CCTV में क्या दर्ज है? मोबाइल किस समय सक्रिय था? उससे ChatGPT पर प्रश्नपत्र कब अपलोड हुआ? क्या डिजिटल फोरेंसिक इसकी पुष्टि करती है? और यदि संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक हुई, तो उसकी जवाबदेही किसकी है?
इन सवालों के उत्तर मिलने से पहले केवल यह कहना कि “साहिल नकल करते पकड़ा गया था”, पूरे प्रकरण का उत्तर नहीं है। IIT Bombay के नियमों में परीक्षा के दौरान मोबाइल, टैबलेट, स्मार्टवॉच और अन्य अनधिकृत उपकरणों का उपयोग academic malpractice माना जाता है और उसके लिए गंभीर शैक्षणिक दंड का प्रावधान है। तो फिर सवाल और भी सीधा है—जिस नियम को लागू करने की जिम्मेदारी संस्थान की है, उस नियम के उल्लंघन का पूरा नैतिक और प्रशासनिक बोझ केवल मृत छात्र के सिर पर क्यों डाला जा रहा है?
नकल हुई तो प्रक्रिया कहाँ थी? मान लीजिए साहिल ने परीक्षा में नियम तोड़ा। तो कानून और संस्थागत नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन कार्रवाई की भी एक प्रक्रिया होती है। नोटिस। रिकॉर्ड। जांच। अपील। अनुशासनात्मक समिति। और छात्र को अपना पक्ष रखने का अवसर।
IIT Bombay का कहना है कि साहिल के विरुद्ध तत्काल कोई disciplinary action शुरू नहीं किया गया था और उसे समझाया गया था। दूसरी ओर परिवार और कुछ छात्रों की ओर से suspension की धमकी और मानसिक दबाव के आरोप सामने आए हैं। यही विरोधाभास अब जांच का केंद्रीय विषय होना चाहिए।