कौम के बच्चों के लिए अन्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की भी निशुल्क तैयारी कराये ट्रस्ट
कानपुर। कौमी मुशावरत के अध्यक्ष सैयद अबुल बरकात नजमी ने परेड स्थित यतीमखाना में छात्रों के लिए नौकरियों की परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग सेंटर स्थापित करने की मांग की है। उनका कहना है कि लंबे समय से यतीमखाना बंद पड़ा है और यहां यतीम बच्चे भी नहीं रह रहे हैं। यतीमखाना खोलने का मकसद यतीम बच्चों को आसरा देना था। निश्चित तौर पर इस यतीमखाना से सैकड़ों यतीम बच्चों को सिर पर छत और दो वक्त का भोजन मिला, जिसकी वजह से कई बच्चे यहीं पढ़कर आत्मनिर्भर भी हुए। लेकिन किन्हीं कारणों से यतीमखाना बंद चल रहा है। इस यतीमखाने का प्रबंधन जिनके पास है, वह केवल इस पापर्टी का इस्तेमाल करके धन अर्जित कर रहे हैं और यतीमखाना ट्रस्ट के नाम से बैंक में जमा लाखों रुपये का इस्तेमाल अपने निजी खर्च के लिए कर रहे हैं।
अबुल बरकात नजमी ने कहा कि क्षेत्रीय लोगों ने उनके आवास पर आकर उनसे मुलाकात की और यतीमखाना में चल रहे गड़बड़ घोटाले को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि शहर के पॉश इलाके में करोड़ों की संपत्ति है, जिसका समाज हित में कोई इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। बातचीत में आम राय बनी कि यतीमखाना मैनेजमेंट पर इस बात का दवाब डाला जाए कि वह यहां कम्पटीशन की तैयारी कर रहे बच्चों के लिए निशुल्क कोचिंग सेंटर शुरू कराये। इसके लिए जरूरत होगी तो समाज के लोग आर्थिक मदद को भी तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि देश भर में मुस्लिम संस्थाएं जैसे जामिया मिल्लिया आदि मुस्लिम बच्चों के साथ ही हर वर्ग के गरीब बच्चों के लिए आईएएस कोचिंग चला रही है। इस कोचिंग में चयन के लिए इम्तिहान लिया जाता है और जो बच्चे पास हो जाते हैं, उन्हें निशुल्क कोचिंग और भोजन के साथ ही रहने की सुविधा दी जाती है। यतीमखाने में इस समय एक भी बच्चा नहीं है, लिहाजा कौम के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए गरीब बच्चों के लिए आईएएस समेत अन्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक निशुल्क कोचिंग सेंटर स्थापित किया जाए।