सत्ता प्राप्त करके ही पिछड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक समाज को मिलेंगे संविधान में निहित अधिकार

आजमगढ़। आजमगढ़ के विधानसभा क्षेत्र सगड़ी की ग्राम पंचायत चिली बिली दान-चिलबिली, पोस्ट बाजार गोसाई विकास खण्ड-हरैया में सामाजिक संस्था बहुजन भारत के तत्वावधान में प्रबुद्ध जन सम्मेलन एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस कुंवर फतेह बहादुर ने कहा कि भारतीय संविधान अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति, तथा पिछड़ा वर्ग के सर्वांगीण विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। हमारे बीच में जितनी समस्याएं हैं उन समस्याऑ का समाधान केवल संविधान में ही है।
इस संविधान में सबसे पहले हमें यह जानना है आखिर वह कौन लोग हैं जो संविधान का विरोध कर रहे हैं। अभी पिछला लोकसभा चुनाव 2024 में हुआ, इसमें कुछ लोगों ने कहा कि अगर हमको 400 सीट मिल गई तो हम संविधान बदल देंगे। हम लोगों को देखना होगा कि वह कौन लोग हैं जो संविधान को बदलना चाह रहे हैं। जो संविधान को बनने देना नहीं चाह रहे थे, वही इस संविधान का विरोध कर रहे हैं।
कुँवर फतेह बहादुर ने कहा कि संविधान सभा में जब बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर अपना अंतिम भाषण दे रहे थे तो उन्होंने कहा कि यह संविधान बहुत अच्छा है यदि इसे लागू करने वालों की नीयत एवं मन्शा अच्छी हो तो यह विश्व का सबसे अच्छा संविधान होगा। यदि संविधान लागू करने वालों की नीयत एवं मन्शा अच्छी नहीं रही तो यह सबसे खराब संविधान साबित होगा।

उन्होंने कहा कि इस संविधान को वही लागू कर पायेगा जो सत्ता में काबिज होगा। अगर संविधान को सही नीयत से लागू करना है तो पीडीए समाज को सत्ता हासिल करनी होगी।
संविधान में दिए गए वोट के अधिकार के जरिये हम सत्ता में काबिज हो सकते हैं। कांशीराम जी ने इसे सत्ता की मास्टर चाभी कहा।
उन्होंने बताया था कि जिसका वोट अधिक होगा वाही अपने वोट की ताकत से सत्ता हासिल कर पायेगा। इसके लिए जो वर्ग यानि दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक इस संविधान से लाभान्वित हो रहा है उसे इकठ्ठा होना पड़ेगा।
इन वर्गों को एकजुट करने के लिए ही कांशीराम जी नें बहुजन समाज बनाया जिसकी आबादी लगभग 85 फ़ीसदी है। इन्हीं 85 फ़ीसदी समाज के लिए कांशीराम जी ने कहा कि जिसकी जितनी सख्या भारी, उतनी उसकी हिस्सेदारी। उन्होंने यह नारा भी दिया कि वोट हमारा राज तुम्हारा नहीं चलेगा, नहीं चलेगा।
उन्होंने कहा कि जब 1992 में बाबरी मस्जिद गिराई गयी और 1993 में यूपी में विधानसभा का चुनाव हुआ तब उस समय कांशीराम जी ने मुलायम सिंह जी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और राज्य में सपा-बसपा गठबंधन की सरकार बनाई। यह सरकार 1995 में संविधान विरोधी ताकतों के षड़यंत्र का शिकार हो गयी और सपा-बसपा अलग-अलग हो गयी। यह हमें हमेशा ध्यान रखना होगा कि जो संविधान विरोधी ताकतें हैं वह बहुजन समाज य्क्गे दलितों, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज को एक नहीं होने देंगी। इन्हें अलग-अलग करने के लिए हर संभव साजिश करते रहेंगे, इससे बहुजन समाज के लोगों को सतर्क रहना होगा।
कुंवर फतेह बहादुर ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में जब सपा और बसपा फिर इकट्ठा हुई और यूपी में मिलकर चुनाव लड़ा, लेकिन संविधान विरोधी शक्तियों ने इन्हें ज्यादा दिनों तक एकजुट नहीं रहने दिया। एक महीने में बसपा ने इस गठबंधन को तोड़ दिया। इस गठबंधन को तोड़ने में मुख्य भूमिका संविधान विरोधी ताकतों की रही। वह जानते हैं कि अगर यह दोनों एक साथ हो जाएंगे तो हम सब सत्ता पर कभी काबिज नहीं हो पाएंगे।
2024 के लोकसभा चुनाव में संविधान विरोधी ताकतों का मनोबल इतना बढ़ा कि उनके लोग कहने लगे कि अगर 400 सीट मिल गई वे संविधान बदल देंगे। इसका प्रभाव दलितों, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज पर पड़ा। इसका नतीजा यह हुआ कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सत्ता में आई, सपा दूसरे नंबर पर आई और बसपा को करारी हार झेलनी पड़ी। विधानसभा की 403 में से मात्र एक सीट ही बसपा जीत पायी। जिससे यह स्पष्ट होता है कि जब-जब दलितों, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के बीच बिखराव होगा तो इसका सीधा लाभ संविधान विरोधी ताकतों को मिलेगा।

उन्होंने कहा कि 2024 में उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के लोगों को पता लगा कि संविधान बदलने की बात चल रही है और अखिलेश यादव ने जब PDA की बात कही तब अनुसूचित जाति पिछड़ा वर्ग ने मिलकर इंडिया गठबंधन में शामिल कांग्रेस-सपा गठबंधन को वोट किया। जिसकी वजह से सपा की 37 सीट आई और कांग्रेस को 6 सीट मिली। और इसी का परिणाम था कि भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया।
हम लोगों को अपने वोट की कीमत समझनी पड़ेगी। संविधान विरोधी लोग तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। कैसे आपका अधिकार को सीमित किया जाए और आपके वोट के अधिकार को खत्म किया जाए।
अब हम लोगों को यह भी देखना पड़ेगा कि बाबा साहब ने जो वोट का अधिकार दिया है उस वोट के अधिकार में इतनी शक्ति है कि जिससे हम सत्ता की प्राप्ति कर सकते हैं।
हम अपने वोट की ताकत से बच्चों के भविष्य का निर्माण कर सकते हैं, उस वोट को इतने सस्ते में किसी को ना दें। जैसे 5 किलो राशन मिल गया और ₹10000 मिल जाए तो उससे खुश होकर अपने वोट का सौदा ना करें।
कुंवर फ़तेह बहादुर ने कहा कि हम पीडीए की एकता को मजबूत बनाये ताकि यूपी में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में सत्ता प्राप्त कर सकें, जिससे संविधान के अनुसार पीडीए समाज के मान-सम्मान और उनके अधिकार की प्राप्ति के लिए काम किया जा सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांशीराम जी का बहुजन समाज और अखिलेश यादव जी का पीडीए समाज दोनों एक ही है, इसलिए दलितों, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों को इससे भ्रमित होने की जरूरत नहीं है।
भारत का संविधान एक तरह से करोड़ों वंचितों, शोषितों ,और उपेक्षित लोगों के सपनों का घोषणा पत्र है : अनिरुद्ध सिंह
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि अगर संविधान ना होता तो शायद समाज के कमजोर वर्ग आज भी हाशिये पर होता, जैसा कि हम सब जानते हैं जब देश आजाद हुआ तब भारतीय समाज में गहरी असमानता थी। लोगों को उनकी जाति धर्म और आर्थिक स्थिति के आधार पर बांटा गया था। ऐसे समय में बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी द्वारा दिए गए संविधान ने यह सुनिश्चित किया कि भारत का लोकतंत्र केवल कुछ लोगों का नहीं बल्कि हर नागरिक का लोकतंत्र होगा। एक ऐसा लोकतंत्र जो न्याय समानता और सम्मान पर आधारित होगा।
भारत का संविधान एक तरह से करोड़ों वंचितों, शोषितों ,और उपेक्षित लोगों के सपनों का घोषणा पत्र है। यह उन लोगों की आवाज है जिन्हे सदियों तक सामाजिक और आर्थिक अधिकारों से दूर रखा गया विशेष रूप से (PDA) समाज जिसमें पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय आते हैं। उनके लिए संविधान सुरक्षा और सम्मान का सबसे बड़ा आधार बना। हमें सोचना होगा, आत्म चिंतन करना होगा कि क्या हमारा लक्ष्य केवल मुफ्त अनाज लेना है या फिर अपने संवैधानिक अधिकारों के दम पर सत्ता और संसाधनों में बराबरी की भागीदारी हासिल करना है। संविधान की जरूरत PDA समाज को ही है। क्योंकि जब संविधान रहेगा तभी PDA समाज के अधिकार रहेंगे इसलिए साथियों इन मुट्ठी भर संविधान विरोधी ताकतों को सत्ता से बाहर निकालने का समय आ गया है और उसका तरीका हम सबके सामने पहले से मौजूद है।

कांशीराम जी ने जो 15 – 85 का फार्मूला दिया वह आज भी सत्ता पाने की चाभी है, जिसके अनुसार भारत में 85% लोग PDA समाज से आते हैं जिसमें पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। अगर यह संगठित हो जाएँ और यह खुद सत्ता में हों तो वह अपने विकास और भविष्य को खुद सुरक्षित कर सकेंगे। अच्छी शिक्षा, अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं और सम्मानजनक रोजगार पा सकेंगे। इसलिए एक बार फिर हमें PDA समाज को शिक्षित करना होगा संगठित करना होगा और फिर साथ में मिलकर संघर्ष करना होगा तब जाकर PDA को राजनीतिक शक्ति मिल पाएगी।
अंत में एक बार फिर मैं अपने युवा भाइयों और बहनों से कहना चाहता हूं कि आइये हम सब मिलकर कंधे से कंधा मिलाकर चलें आपकी ऊर्जा मेहनत और संकल्प से हम एक बेहतर और मजबूत समाज का निर्माण कर सकते हैं। साथ ही मैं अपने बुजुर्गों और वरिष्ठ जनों से विनम्र निवेदन करता हूं कि वह हमें अपना आशीर्वाद और मार्गदर्शन देते रहें। आपका अनुभव और स्नेह ही हमारी सबसे बड़ी प्रेरणा और शक्ति है। जय भीम जय संविधान जय हिंद।
विचार गोष्ठी का आयोजन कार्यक्रम के संयोजक सतीश चन्द्र एवं ओमकार की अध्यक्षता में उनके निज आवास पर हुआ। कार्यक्रम में तुलसीराम पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त उत्तराखंड, राजबली पूर्व ऑडिटर, जीएस प्रियदर्शी, राम नवल पूर्व प्रमुख मेंहनगर, परदेशी राम पूर्व जिला पंचायत सदस्य आदि लोगों ने बाबा साहब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम प्रारंभ होने से पहले उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने अपने स्थान पर खड़े होकर संविधान की शपथ ली। गोष्ठी को रामनवल पूर्व प्रमुख मेंहनगर, जीएस प्रियदर्शी, राजबली पूर्व ऑडिटर, तुलसीराम सेवानिवृत्ति राज्य निर्वाचन आयुक्त उत्तराखंड, परदेशी राम पूर्व जिला पंचायत सदस्य, डॉ. लच्छन आदि ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन लालसाराम पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने किया। कार्यक्रम स्थल पर संजय मास्टर, अनिल मास्टर, रामसूरत बौद्ध, मोहम्मद दियांन, बेचू राम, अजय कुमार, राम पटेल, ओम प्रकाश चिलबिली, मणिपाल, रमोद पटेल, जुल्मी पटेल, विजय प्रधान रौनापार, हरकू राम रावनापार, डॉक्टर तिलकधारी, सिधारी राम मानपुर, राजकुमार यादव, सचिव, जयराम यादव अतुल कुमार ,एडवोकेट राजकुमार आदि उपस्थित रहे।
