सहारनपुर में एक प्राचीन मस्जिद को ढहाए जाने का मामला सिर्फ किसी इमारत का मामला नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता, नागरिक अधिकारों और कानून की सर्वोच्चता से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व यूपी के पूर्व राज्य मंत्री सलाहुद्दीन सिद्दीकी ने सहारनपुर में एक प्राचीन मस्जिद को ढहाए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह सिर्फ किसी इमारत का मामला नहीं है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता, नागरिक अधिकारों और कानून की सर्वोच्चता से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है।
उन्होंने कहा कि अगर मस्जिद या जमीन को अवैध माना गया था, तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए थी और संबंधित पक्ष को अपना रुख पेश करने व अदालत का रुख करने का मौका मिलना चाहिए था। मस्जिद के प्राचीन अस्तित्व से जुड़े दस्तावेजों, नगर निगम के रिकॉर्ड और राजस्व प्रविष्टियों (रिवेन्यू इंद्राजात) का हवाला भी सामने आया है। इसलिए इसे ढहाने से पहले सभी सबूतों की निष्पक्ष जांच जरूरी थी।
सलाहुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में 1991 के पूजा स्थल अधिनियम (Places of Worship Act, 1991) सहित सभी कानूनी पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कानून का लागू होना धर्म या पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि सबके लिए समान होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बुलडोज़र किसी इमारत को मलबे में बदल सकता है, लेकिन किसी ऐतिहासिक दावे या नागरिक के कानूनी हक का फैसला नहीं कर सकता। ऐसे संवेदनशील विवादों का हल प्रशासनिक ताकत के बजाय कानून और अदालत के दायरे में होना चाहिए।