चार दशक का प्रशासनिक अनुभव, बड़े फैसलों की क्षमता और विकास को जमीन पर उतारने का अनुभव संसद के लिए महत्वपूर्ण

लखनऊ। अलोक रंजन को सपा से राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा को लेकर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं यूपी के पूर्व राज्य मंत्री सलाहुद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि अलोक रंजन के पास चार दशक का प्रशासनिक अनुभव, बड़े फैसलों की क्षमता और विकास को जमीन पर उतारने का अनुभव संसद के लिए महत्वपूर्ण है।
सिद्दीकी का कहना है कि ऐसे लोगों की जरूरत पार्टी को हमेशा महसूस होती है जो केवल राजनीति को नहीं, बल्कि शासन की पूरी प्रक्रिया को भीतर से समझते हों।
सलाहुद्दीन सिद्दीकी का कहना है किनीतियां कैसे बनती हैं, प्रशासनिक मशीनरी कैसे काम करती है, बड़े प्रोजेक्ट किस तरह समयबद्ध तरीके से पूरे होते हैं और जनता तक सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे पहुंचता है।
इन सभी विषयों का प्रत्यक्ष अनुभव रखने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी आलोक रंजन का नाम इसी संदर्भ में विशेष महत्व रखता है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव रहे आलोक रंजन को राज्यसभा भेजे जाने की मांग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके पास सार्वजनिक नीति की गहरी समझ और उत्तर प्रदेश के विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्यों का प्रत्यक्ष अनुभव है। वे 1978 बैच के आईएएस अधिकारी रहे और जून 2014 से जुलाई 2016 तक उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव रहे।
सलाहुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से मेरी मांग है कि आलोक रंजन के नाम पर राज्यसभा के लिए गंभीरता से विचार किया जाए।
अधिकारी नहीं, परिणाम देने वाले प्रशासक की पहचान
सलाहुद्दीन सिद्दीकी का आलोक रंजन के प्रशासनिक जीवन को केवल पदों की सूची से नहीं समझा जा सकता। उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी विशेषता काम की समयबद्धता, लगातार मॉनिटरिंग और परिणाम पर जोर रही। उनके आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार मुख्य सचिव रहते हुए लखनऊ मेट्रो परियोजना को 26 महीने में आगे बढ़ाया गया और 302 किलोमीटर लंबे लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे को 22 महीने में पूरा कराने में उनकी महत्वपूर्ण प्रशासनिक भूमिका रही। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसे विशाल प्रोजेक्ट के सामने भूमि, निर्माण, विभागीय समन्वय और समयसीमा जैसी अनेक चुनौतियां थीं। स्वयं आलोक रंजन ने बाद में अपने अनुभवों में बताया कि परियोजना की सफलता के पीछे स्पष्ट समयसीमा, लगातार निगरानी और टीमवर्क महत्वपूर्ण रहे। यही वजह है कि उनके प्रशासनिक कार्यकाल को “फाइलों पर फैसले” से आगे बढ़कर “जमीन पर परिणाम” देने वाली कार्यशैली के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
