हिन्दुओं को झांसे में रखने के लिए हिन्दुत्व की बात करती है भाजपा
लखनऊ। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश प्रताप ने कहा कि भाजपा का हिन्दुत्व सिर्फ उसका जुमला है। इसके अलावा और कुछ भी नहीं है। भाजपा सिर्फ उन्हीं लोगों को हिन्दू मानती है जो उनकी समाज विरोधी गलत विचारधारा से सहमत हैं। जो लोग इनकी समाज को तोड़ने वाली गलत विचारधारा का विरोध करते हैं वे लोग इनकी नजर में पाकिस्तानी, घुसपैठिये, नक्सली और देशद्रोही हैं। इनकी विचारधारा को न मानने वालों को खत्म करने के लिए ये ताकतें उसी तरह की कठोर नीति अपनाते हैं,जैसा तानाशाह अपने विरोधियों के लिए अपनाते थे। इस सरकार के उत्पीड़नात्मक रवैये के बावजूद लोगों में सरकार के खिलाफ जबर्दस्त आक्रोश है और ये आक्रोश इन्हें चुनाव के नतीजों में दिखेगा।

सरकार के खिलाफ जबर्दस्त आक्रोश, ये आक्रोश इन्हें चुनाव के नतीजों में दिखेगा
उन्होंने कहा कि जनाक्रोश के सामने बड़े-बड़े तानाशाह, बादशाह नहीं टिक पाए, उन्हें अपना सिंहासन खाली करना पड़ा। सरकार और निर्वाचन आयोग भी जनाक्रोश के आगे नहीं टिक पाएंगे। जनता 2027 में योगी जी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी। हालांकि सरकार अपने खिलाफ होने वाले किसी भी आंदोलन और आंदोलनकारी को सख्ती से कुचल रही है, जनविरोधी नीतियों के खिलाफ होने वाले शांतिपूर्ण आंदोलन भी नहीं हो पा रहे हैं। इससे राज्य की भाजपा सरकार को यही लगता है कि जनता में उनके खिलाफ किसी भी तरह का कोई गुस्सा नहीं है। वे उनकी नीतियों से सहमत हैं।
अटल जी की भाजपा के समय मतभिन्नता को सम्मान दिया जाता था

अखिलेश प्रताप का कहना है कि राजनीति में मत भिन्नता तो रहती ही है, लेकिन इस सरकार ने मतभिन्नता को मनभिन्नता मान लिया है और जिनके मन इनसे नहीं मिलते वे इन्हें अपना दुश्मन मानते हैं। राजनीति में ये प्रचलन 2014 के बाद मोदी जी के कार्यकाल से शुरू हुआ। जबकि अटल जी की भाजपा के समय मतभिन्नता को सम्मान दिया जाता था। भारतीय संविधान में भी पक्ष-विपक्ष है और दोनों का कर्तव्य देश और स्वस्थ समाज का निर्माण करना है। लेकिन मोदी-योगी तो मतभिन्नता को मनभिन्नता मानकर उसे अपना निजी दुश्मन मानते हैं।
उन्होंने कहा कि माघ मेले में किसी शंकराचार्य को स्नान न करने देना कैसे सही हो सकता है। स्वयंभू हिन्दू घोषित मोदी-योगी की सरकार में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज को स्नान करने से वंचित रखा गया। क्या अब शंकराचार्य जी को भी अपना हिन्दू होने का प्रमाणपत्र देने की जरूरत है। माघ मेले में शंकराचार्य जी और उनके बटुकों व संन्यासियों के साथ जिस तरह का अपमानजनक व्यवहार किया गया,उससे हिन्दू खुश नहीं है। बटुकों को जूतों से पीटना, संन्यासियों की चुटिया घसीटकर उन्हें मारना-पीटना क्या भाजपा के लिए यही हिन्दुत्व है। अब इस सरकार के खिलाफ जनता का आक्रोश बहुत ज्यादा बढ़ गया है, वह सड़क पर संगठित होकर आंदोलन करती जरूर नहीं दिख रही, लेकिन चुनाव में उनका ये आक्रोश नतीजों में जरूरत परिलक्षित होता दिखाई देगा।